पलामू: टीएसपीसी के नए प्रमुख के रूप में शशिकांत गंझू की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। संगठन के पूर्व सुप्रीमो बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद 10 लाख रुपये के इनामी शशिकांत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की जानकारी सामने आई है। खुफिया इनपुट के आधार पर पलामू और चतरा पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, करमा पूजा से पहले शशिकांत अपने दो सहयोगियों के साथ पलामू-चतरा के जंगलों में सक्रिय बताया जा रहा है। आशंका है कि वह त्योहार के दौरान अपने गांव की ओर भी जा सकता है। इन सूचनाओं के बाद मनातू और तरहसी थाना क्षेत्रों के अलावा चतरा से लगने वाले जंगलों में निगरानी बढ़ाई गई है।
सीमावर्ती इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की गतिविधियां पलामू-चतरा सीमा पर बढ़ी हैं। जंगलों और संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चलाने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
शशिकांत के गांव आने की सूचना करीब एक साल पहले भी मिली थी। उस समय तत्कालीन अभियान एसपी राकेश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मनातू थाना क्षेत्र के श्रीकेदाल जंगल पहुंची थी। सर्च के दौरान पुलिस और शशिकांत गंझू व मुखदेव यादव के दस्ते के बीच फायरिंग हुई थी। इस घटना में पलामू पुलिस के जवान सुनील राम और संतन मेहता शहीद हुए थे, जबकि जिला पुलिस बल के जवान रोहित कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। तत्कालीन अभियान एसपी राकेश सिंह भी इस मुठभेड़ में बाल-बाल बचे थे।
माओवादी संगठन से शुरू हुआ सफर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, शशिकांत गंझू ने पहले माओवादी संगठन के कैडर के रूप में काम किया था। बाद में वह टीएसपीसी में शामिल हुआ। संगठन में उसकी भूमिका धीरे-धीरे बढ़ती गई और वह प्लाटून कमांडर से एरिया कमांडर तथा फिर जोनल कमांडर तक पहुंचा।
बताया जाता है कि पलामू-चतरा सीमा क्षेत्र में उसकी सक्रियता करीब दो दशक से रही है। मनातू, पांकी, पिपराटांड़, तरहसी और नावाजयपुर के साथ चतरा के लावालौंग, प्रतापपुर और कुंदा क्षेत्र में भी उसकी गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिलती रही है।
आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी भूमिका
टीएसपीसी के एरिया कमेटी सदस्य आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद संगठन में शशिकांत की जिम्मेदारी बढ़ने की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पहले लेवी की रकम आक्रमण तक पहुंचती थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद यह रकम शशिकांत तक पहुंचने की सूचना है। फिलहाल संगठन में उसकी भूमिका पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कई पुलिस मुठभेड़ों में सामने आया नाम
पुलिस रिकॉर्ड और सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी के मुताबिक, 2021 के बाद शशिकांत के दस्ते के साथ पलामू और चतरा पुलिस की 12 से ज्यादा बार मुठभेड़ हो चुकी है। बुधवार को भी उसके दस्ते और पलामू पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें दो पुलिसकर्मी शहीद हुए और एक जवान घायल हुआ। इसके बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी और बढ़ा दी गई है।
शशिकांत पर झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 50 से अधिक नक्सली हमलों में शामिल होने का आरोप है। करीब दो वर्ष पहले चतरा में अफीम की खेती नष्ट करने गई पुलिस टीम पर हुए हमले में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा पुलिस बल पर हुए एक दर्जन से अधिक हमलों में उसकी कथित संलिप्तता की बात कही गई है।
बृजेश गंझू की मौत के बाद टीएसपीसी में शशिकांत की बढ़ती भूमिका और हालिया गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पलामू-चतरा के जंगलों में विशेष निगरानी रख रही हैं।
