नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय पर्यटन, विमानन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के समक्ष गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की नवीनतम रिपोर्ट ‘इम्पैक्ट ऑफ द वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट’ के अनुसार, इस संकट के कारण भारत में इनबाउंड पर्यटन (विदेशी पर्यटकों का आगमन) में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
हॉस्पिटैलिटी और MICE सेगमेंट पर प्रहार
PHDCCI के पर्यटन समिति के अध्यक्ष आरिफ पराशर ने बताया कि इस तनाव का सर्वाधिक प्रभाव ‘माइस’ (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन) और मेट्रो शहरों के प्रीमियम होटल सेगमेंट पर पड़ा है. सुपर लग्जरी होटलों में फुटफॉल में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है, क्योंकि ये सेगमेंट मुख्य रूप से विदेशी कॉर्पोरेट यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर निर्भर रहते हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से, दक्षिण भारत को उत्तर भारत की तुलना में अधिक नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि दक्षिण भारत का विमानन नेटवर्क खाड़ी देशों के रूट पर अधिक निर्भर है.
विमानन और रोजगार पर संकट के बादल
रिपोर्ट के मुताबिक, विमानन क्षेत्र में उड़ानों के बाधित होने और परिचालन लागत बढ़ने से रोजगार पर भी असर पड़ा है. एक प्रमुख एयरलाइन ने अपने कार्यबल में 8 प्रतिशत की कटौती की है. विमानन और पर्यटन क्षेत्र में आई इस मंदी से उद्योग को कुल मिलाकर लगभग 18,000 करोड़ रुपये का घाटा होने की आशंका जताई गई है.
रेस्टोरेंट उद्योग को भारी क्षति
संकट का सबसे भयावह असर रेस्टोरेंट सेक्टर पर देखा गया है. एलपीजी (LPG) आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान और इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण देश के लगभग 10 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर पहुँच गए हैं. अनुमान है कि इस क्षेत्र को प्रति माह लगभग 79,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर का नुकसान हो रहा है.
घरेलू पर्यटन बना सहारा
विदेशी पर्यटकों की कमी के बीच घरेलू पर्यटन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच का कार्य किया है. जहाँ वार्षिक विदेशी पर्यटक 1 करोड़ से कम हैं, वहीं घरेलू पर्यटकों की संख्या 27-28 करोड़ तक पहुँच गई है. वाराणसी, अयोध्या और अमृतसर जैसे आध्यात्मिक केंद्रों के साथ-साथ गोवा जैसे अवकाश स्थलों में पर्यटकों की संख्या में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है.
बदलता यात्रा पैटर्न
तनाव के कारण भारतीय पर्यटकों के रुझान में भी बदलाव आया है. अब पर्यटक पश्चिम एशिया के बजाय पूर्व एशियाई देशों जैसे जापान, वियतनाम और थाईलैंड को प्राथमिकता दे रहे हैं. अकेले दिल्ली और मुंबई से जापान के लिए प्रतिदिन लगभग 500 वीजा जारी किए जा रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती इस क्षेत्र के लिए बड़ी मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां हैं. हालांकि, भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार होने पर पर्यटन क्षेत्र में त्वरित सुधार (V-shaped recovery) की उम्मीद बनी हुई है.


