रांची: राजधानी रांची सहित राज्यभर में भीषण गर्मी का असर अब शहर में दिखने लगा है. राजधानी में भूगर्भ जल पाताल लोक की ओर चले जाने से वार्ड नंबर 12 ड्राई जोन में तब्दील हो गया है. कई वार्डों में नगर निगम टैंकर से पानी सप्लाई कर लोगों की प्यास बुझाने में लगा है. रांची के कई इलाकों में जलस्तर 800 से 1200 फीट नीचे तक चला गया है. इस वजह से ज्यादातर बोरिंग फेल हो गए हैं.
रांची नगर निगम के उपमहापौर नीरज कुमार कहते हैं कि रांची में ड्राई जोन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वार्ड नंबर 34 का लालपुर क्षेत्र नए ड्राई जोन के रूप में चिह्नित हुआ है. लालपुर जोन में कोकर, कांटा टोली, वर्धमान कंपाउंड, पुरूलिया रोड, कचहरी चौक एरिया आदि आते हैं. इन इलाकों में पहली बार ग्राउंड वाटर लेवल 800 फीट से अधिक नीचे चला गया है.
नगर निगम के कई क्षेत्र पहले से हैं ड्राई जोन
रांची में पहले से मोरहाबादी, हरमू, अशोक नगर, कांके रोड और रातू रोड ड्राई जोन में हैं. अब लालपुर भी इसमें शामिल हो गया है. कडरू स्थित हज भवन के पीछे स्थित तालाब अब पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच चुका है. इस इलाके में रहने वाले मो एकरामुल कहते हैं कि इस पूरे इलाके में जलसंकट की गंभीर समस्या है. तालाब सूख चुका है, चापाकल फेल हो गए हैं, सप्लाई वाटर और टैंकर किसी तरह जलापूर्ति सामान्य रखने की कोशिश में हैं जो अपर्याप्त हैं.

ये वार्ड हो चुके हैं ड्राई जोन
रांची नगर निगम के वार्ड संख्या 2, 3, 10, 18, 19, 22, 23, 27, 28, 32, 34 और 35 का कई इलाका ड्राई जोन में तब्दील हो चुका है. रांची नगर निगम द्वारा क्षेत्र में 128 टैंकर से पानी सप्लाई की जा रही है. जल संकट को लेकर डिप्टी मेयर नीरज कुमार कहते हैं कि अलग-अलग ड्राई जोन बनाकर जलापूर्ति की व्यवस्था की जा रही है. जैसे हटिया क्षेत्र के लिए धुर्वा डैम से, कांके रोड इलाके के लिए आईटीबीपी से पानी मंगवाकर जलापूर्ति कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक सभी घरों में जलापूर्ति पाइप लाइन पहुंचा दिया जाएगा. ऐसे में अगले वर्ष से यह समस्या नहीं होगी.

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए कठोर कदम उठाने होंगे: डिप्टी मेयर
रांची नगर निगम के डिप्टी मेयर ने कहा कि इस समस्या का समाधान तभी होगा, जब हम संवेदनशील होंगे. धरती को चीर कर हम डीप बोरिंग कर पानी का दोहन तो करते हैं. लेकिन पानी रिचार्ज करना भूल जाते हैं. बढ़ती आबादी की वजह से पानी की आवश्यकता बढ़ी है. ऐसे में अगर हमने वर्षा जल से धरती को रिचार्ज नहीं किया तो ड्राई जोन को बनने और बढ़ने से नहीं रोक सकते हैं. उन्होने कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग को धरातल पर उतारने के लिए निगम जागरूकता फैलाने के साथ साथ कठोर दंड का प्रावधान करने की भी योजना बना रहा है.
भूगर्भ जल का दोहन कम से कम करें: डॉ नीतीश प्रियदर्शी
रांची विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्री डॉ नीतीश प्रियदर्शी कहते हैं कि शहर में भूगर्भ जल के पाताल लोक पहुंच जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह भूगर्भ जल का बेतरतीब दोहन है. राजधानी रांची के ही कई तालाब गायब हो गए और कई तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर बर्बाद कर दिए गए. जरूरत है कि हम वर्षा जल का सदुपयोग करें, धरती को रिचार्ज करें और पानी के नेचुरल स्रोतों को बचाएं.


