नई दिल्ली: सोशल मीडिया दिग्गज और फेसबुक की पैरेंट कंपनी, मेटा प्लेटफॉर्म्स ने बुधवार से अपने वैश्विक कार्यबल में बड़े पैमाने पर छंटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस बार कंपनी अपने लगभग 10 प्रतिशत कार्यबल, यानी करीब 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है. यह कदम कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ तेजी से बढ़ते कदम और संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा है.
AI-नेटिव मॉडल पर फोकस
मेटा की चीफ पीपुल ऑफिसर (HR प्रमुख) जेनेल गेल द्वारा कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ज्ञापन (Memo) के अनुसार, कंपनी के कई विभागों को अब ‘AI-नेटिव’ सिद्धांतों के आधार पर फिर से तैयार किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के भीतर प्रबंधन की परतों को कम करना, फ्लैट स्ट्रक्चर बनाना और छोटे समूहों को अधिक स्वामित्व देना है ताकि काम की गति को तेज किया जा सके.
7,000 कर्मचारियों का ट्रांसफर और नए विभाग
इस पुनर्गठन के तहत न केवल छंटनी की जा रही है, बल्कि लगभग 7,000 मौजूदा कर्मचारियों को आंतरिक रूप से नए AI-केंद्रित विभागों में स्थानांतरित किया जा रहा है. इन विभागों में एप्लाइड एआई इंजीनियरिंग (AAI) और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस शामिल हैं. ये टीमें ऐसे एआई एजेंट्स और टूल्स विकसित करेंगी जो भविष्य में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और अन्य परिचालन कार्यों को ऑटोमेट (स्वचालित) कर सकेंगे. इसके अतिरिक्त, कंपनी ने 6,000 खाली पड़े पदों को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश
मेटा इंसानी कार्यबल पर खर्च होने वाले बजट को सीधे तकनीकी बुनियादी ढांचे में लगा रही है. कंपनी ने साल 2026 के लिए अपने पूंजीगत व्यय का अनुमान 125 बिलियन डॉलर से 145 बिलियन डॉलर के बीच रखा है. यह विशाल धनराशि मुख्य रूप से एआई डेटा सेंटर्स, कस्टम सिलिकॉन चिप्स और बड़े पैमाने पर एआई मॉडल ट्रेनिंग के लिए उपयोग की जाएगी.
निगरानी और डेटा विवाद
इस छंटनी के बीच कर्मचारियों में भारी असंतोष और निराशा का माहौल है. विवाद की मुख्य वजह कंपनी का नया ‘मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव’ है, जिसके तहत एआई सिस्टम को ट्रेन करने के लिए कर्मचारियों के कीस्ट्रोक्स और माउस मूवमेंट्स को ट्रैक किया जा रहा है. कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी नौकरियों को खत्म करने वाले एआई को सिखाने के लिए उनके ही डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि यह डेटा केवल एआई सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए है, न कि कर्मचारियों की निगरानी के लिए.


