पटना | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News
बिहार में हवाई कनेक्टिविटी और विमानन उद्योग को विस्तार देने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार सोनपुर और भागलपुर के पास सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ धाम क्षेत्र में दो अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित एयरपोर्ट पर यात्री विमानों के संचालन के साथ-साथ विमान मरम्मत, रखरखाव और पायलट प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है।
इसके लिए राज्य सरकार विशेष एविएशन विजन एंड पॉलिसी तैयार कर रही है। इस नीति के माध्यम से बिहार में विमानन उद्योग, तकनीकी सेवाओं और रोजगार के नए अवसर विकसित करने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
सोनपुर और सुल्तानगंज में विकसित होंगी MRO सुविधाएं
सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार, सोनपुर और अजगैवीनाथ धाम एयरपोर्ट पर विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल की सुविधा विकसित की जा सकती है। विमानन क्षेत्र में इसे MRO यानी मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल कहा जाता है।
इन केंद्रों पर विमानों की तकनीकी जांच, मरम्मत और अन्य जरूरी रखरखाव संबंधी काम किए जा सकेंगे। इससे बिहार में विमानन क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पायलट प्रशिक्षण के लिए बनेंगे फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर
दोनों प्रस्तावित एयरपोर्ट पर फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) स्थापित करने की भी योजना है। यहां पायलटों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
यदि यह योजना जमीन पर उतरती है, तो बिहार में विमानन प्रशिक्षण के लिए नए संस्थान और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे राज्य के युवाओं को विमानन क्षेत्र से जुड़ी ट्रेनिंग और तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल सकता है।
एविएशन पॉलिसी तैयार करने की जिम्मेदारी KPMG को
बिहार सरकार राज्य के लिए व्यापक विमानन नीति तैयार करा रही है। नागरिक विमानन विभाग के सचिव डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे की ओर से जारी संकल्प पत्र में इस संबंध में जानकारी दी गई है।
नीति तैयार करने के लिए गुरुग्राम की कंसल्टेंसी एजेंसी KPMG इंडिया सर्विसेज एलएलपी को परामर्शी नियुक्त किया गया है। इसके लिए एजेंसी को करीब 90 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इसमें लगभग 86.17 लाख रुपये सेवा शुल्क और लागू कर शामिल हैं।
एजेंसी राज्य की भौगोलिक स्थिति, विमानन क्षेत्र की संभावनाओं और व्यावसायिक जरूरतों का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर बिहार के लिए दीर्घकालिक विमानन रोडमैप तैयार किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर, वीरपुर, वाल्मीकिनगर और सहरसा को भी जोड़ने की योजना
राज्य सरकार की योजना केवल दो नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय इलाकों को भी हवाई नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
इसके लिए केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत राज्य के स्वामित्व वाले हवाई अड्डों को विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:
- मुजफ्फरपुर का पताही एयरपोर्ट
- वीरपुर एयरपोर्ट
- वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट
- सहरसा एयरपोर्ट
इन हवाई अड्डों के रनवे और अन्य बुनियादी सुविधाओं को अपग्रेड करने की योजना है, ताकि छोटे वाणिज्यिक विमानों का संचालन संभव हो सके। इससे संबंधित क्षेत्रों की हवाई कनेक्टिविटी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा
क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास से पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। मुजफ्फरपुर, सहरसा, वीरपुर और वाल्मीकिनगर जैसे क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है।
वहीं, सोनपुर और सुल्तानगंज में MRO केंद्र तथा पायलट प्रशिक्षण संस्थान विकसित होने से विमानन क्षेत्र में तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना भी है।
बिहार के विमानन क्षेत्र के लिए तैयार हो रहा दीर्घकालिक रोडमैप
राज्य सरकार की प्रस्तावित विमानन नीति का उद्देश्य बिहार में हवाई यातायात के साथ-साथ विमान रखरखाव, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देना है।
हालांकि, सोनपुर और सुल्तानगंज में एयरपोर्ट निर्माण, MRO केंद्रों और प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए आगे की प्रक्रिया, मंजूरी और निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। ऐसे में इन योजनाओं के जमीन पर उतरने की समयसीमा और वास्तविक स्वरूप पर आगे की सरकारी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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