पटना, 6 नवंबर 2026: बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान से जुड़ी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में HRMS पोर्टल के माध्यम से कथित छेड़छाड़ कर 6,895 मामलों में 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अधिक निकासी की गई है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) से सात दिनों के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है।
विभाग की 4 नवंबर 2026 की समेकित रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग के निदेशक विजय कुमार पांडेय ने 5 नवंबर को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी किया। इसमें वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और एरियर के भुगतान में हुई कथित गड़बड़ी पर जवाब मांगा गया है।
HRMS पोर्टल में छेड़छाड़ कर अधिक निकासी का आरोप
विभागीय पत्र के अनुसार, HRMS पोर्टल पर मेकर, चेकर और अप्रूवर की भूमिका के जरिए कथित तौर पर छेड़छाड़ और कूट रचना कर निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किया गया।
यह अनियमितता मुख्य रूप से तीन मदों में सामने आई है:
- कर्मचारियों के वेतन भुगतान में।
- मकान किराया भत्ता (HRA) में।
- बकाया वेतन यानी एरियर के भुगतान में।
विभाग ने इस मामले को वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया है। इसके लिए बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम 155, 157 और 159 के साथ वित्त विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग के पूर्व निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।
जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
विभागीय पत्र में जिला शिक्षा पदाधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
नियमानुसार, वेतन और भत्तों की देयता की जांच तथा भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) और अप्रूवर की होती है। वहीं, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को पूरी व्यवस्था की निगरानी करनी होती है।
विभाग ने पूछा है कि मेकर, चेकर और अप्रूवर के स्तर पर कथित अनियमितताएं होती रहीं, तो जिला स्तर पर उनकी समय रहते जांच क्यों नहीं की गई। इसे प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी में गंभीर चूक के रूप में देखा गया है।
सात दिनों में दस्तावेजों के साथ देना होगा जवाब
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। जवाब के साथ संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य भी जमा करने होंगे।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर यह माना जा सकता है कि संबंधित अधिकारी को इस मामले में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी चेतावनी
विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों से यह भी पूछा है कि वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के लिए उनके खिलाफ बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।
फिलहाल विभाग ने अधिकारियों से उनका पक्ष और उससे जुड़े साक्ष्य मांगे हैं। सात दिनों की समयसीमा पूरी होने के बाद प्राप्त जवाबों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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