किशनगंज: ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड के दोहरीकरण की लंबे समय से लंबित योजना अब धरातल पर आगे बढ़ने लगी है। करीब 56.41 किलोमीटर लंबे रेलखंड के डबलिंग प्रोजेक्ट के लिए रेलवे बोर्ड ने 916.18 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी है। परियोजना को विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
तीन अहम सरकारी फैसलों से परियोजना को मिली गति
ठाकुरगंज से सिलीगुड़ी के बीच दूसरी रेल लाइन बिछाने की योजना को जून और जुलाई 2026 में लगातार महत्वपूर्ण मंजूरियां मिलीं। इससे परियोजना के लिए बजट, विशेष दर्जा और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ है।
रेलवे बोर्ड ने 8 जून 2026 को इस परियोजना की अनुमानित लागत को मंजूरी दी। इसके बाद रेल मंत्रालय के पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे निर्माण संगठन ने इसे विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया।
₹916.18 करोड़ में होंगे अलग-अलग काम
स्वीकृत राशि को परियोजना के विभिन्न हिस्सों के लिए निर्धारित किया गया है।
- ₹671.55 करोड़ सिविल निर्माण कार्यों के लिए
- ₹149.69 करोड़ सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन व्यवस्था के लिए
- ₹94.94 करोड़ विद्युत कार्यों के लिए
वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब परियोजना निर्माण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
विशेष रेल परियोजना का मिला दर्जा
रेल मंत्रालय की ओर से 29 जून 2026 को जारी अधिसूचना में ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड के दोहरीकरण को ‘स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट’ घोषित किया गया। यह अधिसूचना 10 जुलाई 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुई।
परियोजना का विस्तार बिहार और पश्चिम बंगाल, दोनों राज्यों के हिस्सों में है। विशेष दर्जा मिलने से जमीन अधिग्रहण सहित अन्य प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
बिहार और बंगाल में भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी तय
परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में 14 जुलाई 2026 को एक और अधिसूचना जारी की गई। इसके तहत दोनों राज्यों में भूमि अधिग्रहण के लिए संबंधित अधिकारियों को अधिकृत किया गया है।
बिहार क्षेत्र के लिए किशनगंज के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पश्चिम बंगाल के हिस्से के लिए सिलीगुड़ी के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी को अधिकृत किया गया है।
अब संबंधित जमीन मालिकों को नोटिस देने और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
रेल यातायात की क्षमता बढ़ने की उम्मीद
ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड के डबलिंग से उत्तर बंगाल और सीमांचल क्षेत्र के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। दूसरी लाइन उपलब्ध होने से इस मार्ग पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और यात्री तथा मालगाड़ियों के परिचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
एकल रेल लाइन पर ट्रैफिक दबाव कम होने से ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
अब जमीन पर काम शुरू होने का इंतजार
परियोजना को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़ी गतिविधियां हैं। स्थानीय लोगों की नजर अब सर्वेक्षण, जमीन संबंधी नोटिस, मुआवजा प्रक्रिया और इसके बाद शुरू होने वाले निर्माण कार्यों पर है।
लंबे समय से दोहरीकरण की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों और क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।
