रांची, 15 अक्टूबर 2026: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत एंबुलेंस चालकों के नियमितीकरण के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, हजारीबाग को 12 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
यह मामला संतोष कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है, जो वर्ष 2008 से स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत एंबुलेंस चालक के रूप में संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं।
2008 में हुई थी नियुक्ति
याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2008 में एंबुलेंस चालक के पद पर हुई थी। नियुक्ति के बाद से वे लगातार संविदा के आधार पर अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। लगभग 18 वर्षों तक काम करने के बावजूद उनके नियमितीकरण का मामला लंबित रहा।
लंबे समय से नियमितीकरण नहीं होने के कारण चालकों ने इस मामले को न्यायालय के समक्ष उठाया।
अदालत में नियमितीकरण का मामला उठा
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित चालक लंबे समय से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके नियमितीकरण पर निर्णय नहीं लिया गया है।
मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, हजारीबाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
12 सप्ताह के भीतर करनी होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने नियमितीकरण की प्रक्रिया के संबंध में 12 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने को कहा है। अब संबंधित विभागीय अधिकारी को अदालत के निर्देश के अनुरूप मामले पर आगे बढ़ना होगा।
हालांकि, अदालत के इस निर्देश का अर्थ तत्काल नियमित नियुक्ति मिलना नहीं है। नियमितीकरण पर अंतिम स्थिति संबंधित विभाग की कार्रवाई और लागू नियमों के अनुसार स्पष्ट होगी।
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