Ranchi News, 6 November 2026: झारखंड के वन विभाग में रेंजरों की कमी के बीच सेवानिवृत्त अधिकारियों के सेवा विस्तार का प्रस्ताव पिछले सात महीने से सरकार के पास लंबित है। अधिकारियों की कमी के कारण वन विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ जंगलों की निगरानी भी प्रभावित हो रही है।
383 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 14 रेंजर कार्यरत
राज्य में रेंज अफसरों के कुल 383 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 14 रेंजर ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। इस भारी कमी के कारण वन विभाग की योजनाओं को लागू करने में परेशानी हो रही है।
इसके अलावा जंगलों में अवैध कटाई, वन क्षेत्रों में खनन और अन्य गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
मार्च 2024 में कैबिनेट ने लिया था फैसला
रेंजरों की कमी को देखते हुए मार्च 2024 में हुई कैबिनेट की बैठक में सेवानिवृत्त रेंजरों को तीन साल का सेवा विस्तार देने का फैसला किया गया था। इसका उद्देश्य अधिकारियों की कमी के कारण वन विभाग की योजनाओं को प्रभावित होने से बचाना था।
कैबिनेट के फैसले के बाद सेवानिवृत्त रेंजरों को दो बार सेवा विस्तार दिया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तीसरा प्रस्ताव लंबित
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सेवानिवृत्त रेंजरों को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया था। हालांकि, यह प्रस्ताव पिछले सात महीने से विचाराधीन है।
इस बीच विभाग में ऐसे अधिकारियों से काम लिया जा रहा है, जिनके सेवा विस्तार का मामला सरकार के पास लंबित है।
वन विभाग के कामकाज पर पड़ रहा असर
रेंजरों की कमी के कारण वन विभाग के सामने प्रशासनिक और निगरानी संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। जंगलों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर नियंत्रण और वन क्षेत्रों में खनन जैसी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त अधिकारियों की जरूरत है।
अब सबकी नजर सरकार के पास लंबित सेवा विस्तार के प्रस्ताव पर है। इस पर निर्णय होने से विभाग को अधिकारियों की कमी से निपटने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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