Ranchi News, 6 November 2026: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के नवनिर्मित मुख्य द्वार से वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय का नाम मिटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्रों और छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस बीच विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मनोहर ने स्पष्ट किया है कि मुख्य द्वार पर वीर बुधु भगत का नाम विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं, बल्कि छात्रों और छात्र संगठनों ने लिखवाया था।
नाम मिटाए जाने के विरोध में छात्रों ने किया प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, गुरुवार, 5 नवंबर को छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित मुख्य द्वार पर ‘वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय’ का नाम लिखवाया था। हालांकि, उसी रात अज्ञात लोगों ने नाम मिटा दिया।
शुक्रवार को इसकी जानकारी मिलने के बाद छात्रों में नाराजगी फैल गई। छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर और सोशल मीडिया पर घटना का विरोध किया। इसके बाद सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वीर बुधु भगत का नाम मिटाने वालों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाए। छात्रों ने कहा कि दोषियों को चिह्नित किए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कुलपति बोले- सरकार ने अभी विश्वविद्यालय को नहीं सौंपा है गेट
मामले पर कुलपति राजीव मनोहर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मुख्य द्वार पर नया नाम नहीं लिखवाया गया था। उनके मुताबिक, नवनिर्मित मुख्य द्वार अभी तक सरकार की ओर से औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय को हस्तांतरित नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि छात्रों और छात्र संगठनों ने स्वयं गेट पर नाम लिखवाया था। फिलहाल विश्वविद्यालय में दीपावली की छुट्टियां चल रही हैं। विश्वविद्यालय खुलने के बाद इस मामले में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
2025 में कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी थी मंजूरी
दरअसल, वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम के तहत रांची कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देते हुए इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रखा था।
इसके बाद से ही विभिन्न आदिवासी संगठनों और छात्र संघों की ओर से विश्वविद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम पर रखने की मांग की जा रही थी।
इस मांग के मद्देनजर 8 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद नाम परिवर्तन की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
करीब 1.80 करोड़ रुपये से बन रहा है मुख्य द्वार
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार का निर्माण पिछले दो से तीन वर्षों से कराया जा रहा है। इस पर करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण के दौरान जब गेट का आधा ढांचा तैयार हुआ था, तब छात्र संगठनों ने उस पर वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय का नाम लिखवाया था।
अब नाम मिटाए जाने की घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में नया विवाद खड़ा कर दिया है। छात्र संगठनों ने दोषियों की पहचान और कार्रवाई की मांग दोहराई है।
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