रांची, 22 अक्टूबर 2026। झारखंड में मुख्यमंत्री दाल वितरण योजना के तहत लाभुकों तक दाल पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान होने के बावजूद कई राशन दुकानों में दाल की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। राशन डीलरों का दावा है कि पिछले 10 महीनों में उन्हें केवल दो महीने की दाल मिली है, जबकि विभागीय जानकारी के अनुसार तीन महीने की आपूर्ति के लिए टेंडर किया गया था।
टेंडर और भुगतान के बाद भी आपूर्ति की स्थिति अस्पष्ट
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर की अवधि के लिए तीन महीने की दाल आपूर्ति का टेंडर किया गया था। इसके लिए संबंधित कंपनी को फरवरी में ही भुगतान कर दिया गया था। इसके बावजूद राशन दुकानों तक दाल पहुंचने और लाभुकों को वितरण की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि आहार पोर्टल पर दाल वितरण से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था में विवरण दर्ज नहीं होने से वास्तविक आपूर्ति और वितरण का आकलन करना मुश्किल हो रहा है।
विभाग ने इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है। अब जिला स्तर से मिलने वाली जानकारी के आधार पर वितरण की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
स्मार्ट पीडीएस व्यवस्था पर भी सवाल
राज्य सरकार की ओर से स्मार्ट सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस व्यवस्था लागू होने की बात कही जाती है। इसके तहत पॉस मशीन को इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन से जोड़कर राशन वितरण का विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाता है।
हालांकि, दाल वितरण के मामले में ऑनलाइन रिकॉर्ड की अनुपलब्धता ने निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। जब आपूर्ति के लिए टेंडर और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी है, तो लाभुकों को नियमित रूप से दाल क्यों नहीं मिल रही है—यह सवाल अब भी बना हुआ है।
रांची की राशन दुकानों पर भी कमी का असर
राजधानी रांची की कई राशन दुकानों में भी दाल की कमी की बात सामने आई है। सरकारी राशन पर निर्भर परिवारों का कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें दाल नहीं मिल रही है। त्योहार के दौरान भी दाल मिलने की उम्मीद पूरी नहीं होने से लाभुकों में निराशा है।
राशन दुकानदार दीपक गुप्ता के अनुसार, जब सरकार की ओर से सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो डीलर लाभुकों को उसका वितरण कैसे कर सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि चीनी की आपूर्ति लंबे समय से बंद है और दाल भी नियमित रूप से नहीं मिल रही है।
उनके मुताबिक, लाभुक बार-बार राशन की उपलब्धता के बारे में पूछते हैं, लेकिन आपूर्ति की स्पष्ट जानकारी नहीं होने के कारण दुकानदार भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते।
करीब 60 लाख राशन कार्डधारकों तक पहुंचनी है सुविधा
झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 59,83,918 राशन कार्डधारी हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से इन परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री दाल वितरण योजना और खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र ग्रीन कार्डधारकों को एक रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने एक किलो चना दाल देने का प्रावधान बताया गया है। लेकिन आपूर्ति में अनियमितता के कारण पात्र लाभुकों को इस सुविधा का लाभ समय पर नहीं मिल पाने की शिकायत है।
लाभुकों ने नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की
राशन कार्डधारक शिव कुमार ने कहा कि त्योहार के समय दाल नहीं मिलना दुखद है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गरीब परिवारों को अनाज, दाल, चीनी और कपड़े जैसी जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
फिलहाल, दाल वितरण को लेकर विभागीय स्तर पर जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आपूर्ति कहां बाधित हुई और लाभुकों तक दाल नहीं पहुंचने के पीछे क्या कारण हैं। योजना के बजट, टेंडर, भुगतान और वास्तविक वितरण के बीच स्थिति स्पष्ट करना विभाग के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।
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