रांची। झारखंड में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं को परखने के लिए चल रही प्रमाणन प्रक्रिया के तहत 82 विद्यालयों को गोल्ड सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। इस प्रक्रिया में केवल परीक्षा के नतीजों को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता से लेकर स्कूल के वातावरण और शिक्षकों की कार्यक्षमता तक कई पहलुओं की जांच की गई।
यह मूल्यांकन झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की स्कूल सर्टिफिकेशन व्यवस्था के तहत कराया गया। राज्य के सभी 24 जिलों के स्कूल गोल्ड श्रेणी में शामिल हुए हैं।
1,456 स्कूलों का हुआ थर्ड पार्टी असेसमेंट
मूल्यांकन के लिए राज्य के 1,456 सरकारी विद्यालयों को शामिल किया गया था। यह आकलन दो चरणों में हुआ। पहले चरण में 741 और दूसरे चरण में 715 स्कूलों का मूल्यांकन कराया गया। इस दौरान करीब 2.39 लाख विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को सीधे जांचा गया।
अलग-अलग मानकों पर मिले प्रदर्शन के आधार पर विद्यालयों को प्रमाणन की विभिन्न श्रेणियों में रखा गया। गोल्ड श्रेणी तक पहुंचने वाले विद्यालयों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों के स्कूल शामिल हैं।
सीखने की क्षमता को सबसे ज्यादा महत्व
स्कूलों की गुणवत्ता जांचने के लिए मूल्यांकन को तीन बड़े हिस्सों में बांटा गया था।
- विद्यार्थियों का लर्निंग लेवल – 50 प्रतिशत
- स्कूल का वातावरण और आधारभूत सुविधाएं – 40 प्रतिशत
- शिक्षकों की क्षमता एवं शिक्षण प्रक्रिया – 10 प्रतिशत
इसमें बच्चों की कक्षा के अनुरूप सीखने की स्थिति को सबसे अधिक वेटेज दिया गया।
कक्षा 1 से 3 तक बच्चों की बुनियादी भाषा और गणित संबंधी क्षमताओं को मौखिक तथा गतिविधि आधारित तरीकों से परखा गया। कक्षा 4 से 8 के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नपत्र और ओएमआर के माध्यम से भाषा, गणित तथा पर्यावरण अध्ययन/विज्ञान से संबंधित समझ की जांच की गई। उच्च कक्षाओं में भी लिखित और कुछ मामलों में ओएमआर आधारित मूल्यांकन किया गया।
गोल्ड सर्टिफिकेशन के लिए जरूरी थी 75 फीसदी दक्षता
गोल्ड श्रेणी हासिल करने के लिए विद्यालय में कम से कम 75 प्रतिशत विद्यार्थियों का कक्षा के अनुरूप दक्षता स्तर हासिल करना जरूरी था। इसके अलावा सिल्वर श्रेणी के निर्धारित मानकों को पूरा करना और मूल्यांकन के दिन कम से कम 75 प्रतिशत विद्यार्थियों की उपस्थिति भी आवश्यक थी।
बाहरी मूल्यांकन टीमों ने विद्यालयों में जाकर केवल विद्यार्थियों का टेस्ट नहीं लिया। स्कूल की साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, मध्याह्न भोजन, रसोईघर, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर सुविधा, खेलकूद की व्यवस्था समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी देखा गया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाएं भी मूल्यांकन का हिस्सा रहीं।
शिक्षकों की कक्षा में पढ़ाने की शैली, उनकी क्षमता और प्रशिक्षण से जुड़ी जरूरतों का भी आकलन किया गया।
रांची के छह विद्यालय गोल्ड श्रेणी में
रांची जिले से छह सरकारी स्कूलों ने गोल्ड सर्टिफिकेशन हासिल किया है। इनमें पीएम श्री आजाद हाई स्कूल, मध्य विद्यालय बजराडीह, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बरियातू, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट जिला विद्यालय, मध्य विद्यालय जगन्नाथपुर और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय लापुंग शामिल हैं।
मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बरियातू के प्राचार्य दीपक कुमार के अनुसार, विद्यालय में अकादमिक गतिविधियों के साथ खेलकूद को भी महत्व दिया जाता है। वहीं मुख्यमंत्री उत्कृष्ट जिला विद्यालय की प्राचार्य डॉ. यास्मीन ने स्कूल में बेहतर शैक्षणिक माहौल और आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिए जाने की बात कही।
स्कूलों के बीच बेहतर प्रदर्शन की भावना पैदा करना उद्देश्य
JEPC निदेशक शशि रंजन के अनुसार, स्कूल सर्टिफिकेशन कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित करना है। उनका कहना है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों में अपनाई जा रही प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य विद्यालयों तक पहुंचाया जा सकता है।
गोल्ड स्कूलों के प्राचार्यों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
गोल्ड सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाले 82 विद्यालयों के प्राचार्यों के लिए पांच दिवसीय शैक्षणिक और नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए प्राचार्यों को राजस्थान भेजे जाने की योजना है। प्रशिक्षण में स्कूल नेतृत्व, आधुनिक शिक्षण तकनीक और बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित करने जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।
इस बीच स्कूल सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को आगे भी जारी रखने की तैयारी है। अगले चरण में करीब 1,400 नए सरकारी विद्यालयों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यालयों की गुणवत्ता को नियमित रूप से परखने के साथ-साथ सुधार के लिए जरूरी क्षेत्रों की पहचान करना है।
