Friday, June 12, 2026

गांव और जंगल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पलामू में बर्तन बैंक तैयार किया जा रहा है.

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पलामू: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में मौजूद गांव और जंगल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की गई है. पलामू टाइगर रिजर्व ईको डेवलपमेंट समिति के माध्यम से बर्तन बैंक तैयार किए जा रहे हैं. बर्तन बैंक से पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में मौजूद सभी गांव को जोड़े जाने का लक्ष्य रखा गया है.

ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी फैल रहा स्टायरोफोम और प्लास्टिक

दरअसल, पिछले एक दशक में झारखंड के ग्रामीण इलाकों में तेजी से बदलाव हुआ है, यह बदलाव पलामू टाइगर रिजर्व के मौजूद गांव में भी पहुंचा है. ग्रामीण शादी, पार्टी, बैठक या किसी तरह के आयोजन में प्लास्टिक की प्लेट, स्टायरोफोम से बने प्लेट और प्लास्टिक से बनी अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनके इस्तेमाल से पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में प्रदूषण के बढ़ने का खतरा है, साथ ही साथ वन्य जीवों को भी नुकसान होने का चांस है.

वन्य जीव और जंगल को बचाने के लिए तैयार किया जा रहा बर्तन बैंक

स्टायरोफोम और प्लास्टिक की प्लेट जंगल और वन्य जीव के लिए बड़ा खतरा है. इसी बात को ध्यान में रखकर पलामू टाइगर रिजर्व ने बर्तन बैंक तैयार करने की योजना बनाई है. शुरुआती दौर में पलामू टाइगर रिजर्व में एक डेवलपमेंट कमेटी के माध्यम से 6 के करीब गांवों में बर्तन बैंक को तैयार कर लिया है. पलामू टाइगर रिजर्व एवं उसके आसपास के क्षेत्र में 208 से भी अधिक गांव हैं, इन सभी गांव को बर्तन बैंक से जोड़ने की योजना है.

ग्रामीणों को दिए जाएंगे बर्तन बैंक से बर्तन

पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में 109 के करीब ईको डेवलपमेंट कमेटी हैं. समिति को पलामू टाइगर रिजर्व की तरफ से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे बर्तन बैंक स्थापित कर सकें. बर्तन बैंक के माध्यम से ग्रामीणों को शादी, विवाह एवं अन्य समारोह के लिए बर्तन उपलब्ध करवाए जाएंगे ताकि ग्रामीण स्टायरोफोम या प्लास्टिक के इस्तेमाल से बच सके.

गांव में पहले पत्तल का इस्तेमाल होता था लेकिन स्टायरोफोम और प्लास्टिक का इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ा है. इसी को ध्यान में रखकर एक सामाजिक बदलाव के लिए ग्रामीणों के साथ बातचीत की गई थी. बातचीत के बाद बर्तन बैंक तैयार करने का निर्णय लिया गया है. बर्तन बैंक का संचालन पूरी तरह से ईको डेवलपमेंट कमेटी करेगी. बर्तन बैंक से दो तरह के फायदे होने वाले हैं. पर्यावरण को नुकसान कम होगा, साथ ही साथ समिति को भी कुछ आमदनी होगी. बर्तन बैंक के माध्यम से ग्रामीणों को बर्तन उपलब्ध करवाए जाएंगे और इसके एवज में बेहद ही कम रेंट लिया जाएगा: प्रजेशकान्त जेना, उप निदेशक, पीटीआर

पलामू टाइगर रिजर्व 1129 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में कई पर्यटन स्थल हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक प्लास्टिक लेकर जाते हैं. बेतला नेशनल पार्क, नेतरहाट समेत कई इलाकों में बड़े आयोजन होते हैं, जहां प्लास्टिक की प्लेट और स्टायरोफोम का इस्तेमाल होता है. हालांकि बेतला नेशनल पार्क और अन्य पर्यटन स्थल पर प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. दोनों वन्य जीव और जंगल के लिए खतरनाक हैं. पलामू टाइगर रिजर्व में पर्यावरण दिवस के बाद से लोगों में जागरूकता फैलाने के अभियान की शुरूआत हुई है और बर्तन बैंक के बारे में जानकारी फैलाई जा रही है.

स्टायरोफोम या प्लास्टिक का इस्तेमाल बेहद ही खतरनाक है. दोनों को रसायनिक प्रक्रिया के बाद तैयार किया जाता है. प्लास्टिक को लोग जंगल में ऐसे ही छोड़ देते हैं. कभी-कभी वन्य जीव इन्हें खा लेते हैं और उनकी पाचन तंत्र प्रभावित होता है. प्लास्टिक या स्टायरोफोम को पचाया नहीं जा सकता है. वन्य जीवों के स्वास्थ्य के लिए यह बेहद ही खतरनाक है, उनकी पाचन प्रक्रिया पूरी तरह से कमजोर हो जाती है. प्लास्टिक, जंगल में फेंकने के बाद उसके नीचे कोई भी जड़ या अन्य पेड़ पौधा पनप नहीं पाता है. दोनों बेहद ही खतरनाक तरीके से इको सिस्टम को प्रभावित करते हैं: प्रोफेसर डीएस श्रीवास्तव, एक्सपर्ट, वाइल्ड लाइफ

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