Friday, June 12, 2026

क्रिकेट के मैदान पर तेज गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले आकाशदीप अब जीवन की नई पाई शुरू करने जा रहे हैं.

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रोहतास : भारतीय टीम के तेज गेंदबाज के घर जल्द ही शहनाई गूंजने वाली है. रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड स्थित बड्डी गांव के रहने वाले आकाशदीप की शादी तय हो गई है. उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. गांव के लोग इस खास मौके का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

आकाशदीप की होने जा रही शादी : जानकारी के अनुसार 21 जून को आकाशदीप के पैतृक गांव बड्डी में परंपरागत तिलक समारोह का आयोजन किया जाएगा. इसके बाद 22 जून को मेहंदी और 23 जून को हल्दी की रस्म संपन्न होगी. सभी पारंपरिक कार्यक्रम गांव में आयोजित किए जाएंगे. जिसमें परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों की बड़ी भागीदारी रहेगी.

Akashdeep marriage

वाराणसी में लेंगे 7 फेरे : शादी समारोह 24 जून को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित एक भव्य पांच सितारा होटल में आयोजित किया जाएगा. इस हाई प्रोफाइल शादी समारोह में क्रिकेट. राजनीति, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों की कई नामचीन हस्तियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि अतिथियों की आधिकारिक सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है.

आकाशदीप की दुल्हन : आकाशदीप की शादी डेहरी के मानिकपुर निवासी अक्षिता राज के साथ तय हुई है. अक्षिता राज, रोहतास जिले के इंद्रपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मानिकपुर गांव निवासी अमित कुमार सिंह (बबलू जी) एवं रेणु सिंह की पुत्री हैं. बताया जाता है कि दोनों परिवार की सहमति से यह रिश्ता तय हुआ है. यह पूरी तरह से पारंपरिक और अरेंज मैरिज है. जिसे परिवार के बड़े बुजुर्गों ने मिलकर तय किया है.

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कौन हैं आकाशदीप की दुल्हनिया? : अक्षिता राज ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने बीसीए और एमसीए की पढ़ाई उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ पूरी की है. शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें संस्थान में नौकरी का अवसर भी मिला था, लेकिन इसी दौरान विवाह की बातचीत आगे बढ़ने के कारण उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की.

बांटा जा रहा है निमंत्रण पत्र : शादी को लेकर आकाशदीप के पैतृक गांव बड्डी में अभी से तैयारी शुरू हो गई है. गांव की गलियों और घरों को सजाने का काम धीरे-धीरे प्रारंभ हो चुका है. शादी के निमंत्रण पत्र भी रिश्तेदारों और परिचितों के बीच बांटे जा रहे हैं. आकाशदीप ने बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से मिलकर उन्हें कार्ड दिया.

यही नहीं उनकी मां लडुमा देवी रोहतास की डीएम उदिता सिंह से मिलने पहुंची और उन्हें शादी का कार्ड दिया. हालांकि आकाशदीप इस समय गांव में मौजूद नहीं है. वह शादी के निमंत्रण कार्ड वितरण और अन्य जरूरी तैयारी के सिलसिले में बाहर हैं. इसके बावजूद परिवार के सदस्य और ग्रामीण मिलकर शादी की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं.

ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह : गांव के लोगों का कहना है कि आकाशदीप ने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर न केवल रोहतास बल्कि पूरे बिहार का नाम देश दुनिया में रोशन किया है. ऐसे में उनके विवाह समारोह के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. ग्रामीणों का मानना है कि यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे गांव और जिले का गौरवपूर्ण अवसर है.

”बहुत अच्छा लग रहा है. आकाशदीप सर की शादी तय हो गई है, जल्द ही उनके सिर पर सेहरा सजेगा, 24 जून को दूल्हा बनेंगे. बहुत उत्साह है. फुल मस्ती होगी.”- स्वाति मौर्य, स्थानीय

भगवान भोले के भक्त : बताते चलें कि आकाशदीप भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त हैं. वह समय मिलते ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी पहुंचते हैं. उनकी बहन ज्योति सिंह ने पहले ही संकेत दिया था कि आकाशदीप बाबा भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में ही सात फेरे लेंगे.

प्रशंसक और शुभचिंतक दे रहे बधाई : शादी की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों की ओर से लगातार बधाईयों का सिलसिला जारी है. सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें नई जिंदगी की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं. आने वाले दिनों में बड्डी गांव में होने वाले पारंपरिक समारोह और वाराणसी में आयोजित होने वाली भव्य पारंपरिक समारोह पर सभी की निगाहें टिकी हुई है.

आकाशदीप के क्रिकेट करियर की बात करें तो उन्होंने अपनी मेहनत लगन और शानदार प्रदर्शन के बल पर भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान स्थापित करने वाले इस युवा तेज गेंदबाज ने कम समय में ही क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में खास स्थान बना लिया है. अब उनके जीवन का यह नया अध्याय भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

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पारिवारिक संकट : महज 16 साल की उम्र में ही आकाशदीप ने अपने पिता को खो दिया था. उसके ठीक 6 महीने बाद ही उनके बड़े भाई का भी निधन हो गया. उस समय बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पर बैन था. इस वजह से उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए बिहार छोड़ना पड़ा. वह बंगाल गए और वहां के क्लब क्रिकेट खेलकर भारतीय टीम तक का रास्ता तय किया.

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