Tuesday, April 28, 2026

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण सेंसेक्स 852 अंक गिरा, निफ्टी में भी भारी गिरावट रही और निवेशकों को नुकसान हुआ.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार (23 अप्रैल, 2026) का दिन निराशाजनक रहा. वैश्विक दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों की धारणा पर बुरा असर पड़ा.

बाजार का हाल
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 852.49 अंक (1.09%) गिरकर 77,664.00 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 205 अंक (0.84%) की गिरावट के साथ 24,173.05 पर सिमट गया. बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए.

गिरावट के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना है. रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फिलहाल 103 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता में आई रुकावट ने निवेशकों को डरा दिया है. ‘एनरिच मनी’ के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते नियंत्रण और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

सेक्टरवार प्रदर्शन
बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा

  • सबसे ज्यादा गिरावट: निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक (PSU Bank) इंडेक्स में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
  • अन्य सेक्टर: निफ्टी आईटी (1.25%) और निफ्टी रियल्टी (1.84%) भी लाल निशान में बंद हुए.
  • अपवाद: गिरावट के इस दौर में निफ्टी फार्मा एकमात्र बड़ा गेनर्स रहा, जो 2% की बढ़त के साथ बंद हुआ.

कमोडिटी मार्केट और वैश्विक संकेत
बाजार के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट में भी हलचल रही. 24 कैरेट सोने की कीमत हल्की गिरावट के साथ 1,51,870 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रही, जबकि चांदी 2.53% गिरकर 2,42,072 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा. जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स भी गिरावट के साथ बंद हुए. केवल दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) बढ़त बनाने में कामयाब रहा.

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.

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