Monday, July 6, 2026

एक्सपर्ट ने कहा कि AI से ढेरों नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन वर्कर्स को टेक्नोलॉजी के हिसाब से ढलना होगा.

Share

एक्सपर्ट ने कहा कि AI से ढेरों नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन वर्कर्स को टेक्नोलॉजी के हिसाब से ढलना होगा.

नई दिल्लीः भारत का टेक्नोलॉजी क्षेत्र एक अजीब विरोधाभास का गवाह बन रहा है. एक तरफ जहां एआई (AI-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कारण होने वाली छंटनी के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित देश बनकर उभरा है, वहीं दूसरी तरफ देश में एआई टैलेंट की मांग दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही है. यह इस बात का संकेत है कि कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम नहीं कर रही हैं, बल्कि वे अलग स्किल्स वाले लोगों को नौकरी पर रख रही हैं.

वैश्विक स्तर पर छंटनी पर नजर रखने वाले ट्रैकर ‘Layoffs.fyi’ के अनुसार, साल 2026 की पहली छमाही में एआई द्वारा काम संभाले जाने और कंपनियों के पुनर्गठन के कारण दुनिया भर में लगभग 1.28 लाख आईटी नौकरियां खत्म हो गईं. इन छंटनियों में भारत की हिस्सेदारी 7.16% थी, जो केवल संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) से पीछे है. जहां दुनिया की सबसे ज्यादा 71.33% नौकरियां गईं.

3 जुलाई को जारी ‘Naukri.com’ के आंकड़ों से पता चला है कि जहां भारत में आईटी क्षेत्र की कुल नियुक्तियों में पिछले साल की तुलना में 3% की गिरावट आई है, वहीं एआई से जुड़ी विशेष भूमिकाओं के लिए नियुक्तियों में 16% का उछाल आया है.

इसके अलावा, टेक सेक्टर के बाहर जैसे एफएमसीजी (FMCG), बीमा (इंश्योरेंस) और रिटेल (खुदरा व्यापार) जैसे क्षेत्रों में भी एआई और ऑटोमेशन से जुड़े पदों पर नियुक्तियां 25% तक बढ़ी हैं. जो विभिन्न उद्योगों में एआई के बढ़ते कदम को दर्शाती हैं.

AI JOBS INDIA

पारंपरिक आईटी नौकरियों पर बढ़ा दबाव

यह बदलाव साल 2022 के आखिर में जनरेटिव एआई (Generative AI) के मुख्यधारा में आने के बाद से ही दिखने लगा था. साल 2023 में, भारत में लगभग 15,000 से 18,000 टेक कर्मचारियों की छंटनी देखी गई. विशेष रूप से एडटेक (EdTech – ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ी कंपनियां) और पारंपरिक आईटी फर्मों में, क्योंकि कंपनियों ने सामान्य सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के बजाय अपना निवेश AI प्रोजेक्ट्स की तरफ मोड़ दिया.

साल 2024 तक, कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी से तो परहेज किया, लेकिन नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी. खासकर फ्रेशर्स के लिए. 651 आईटी कंपनियों पर किए गए एक आईसीआरआईईआर (ICRIER) सर्वेक्षण में पाया गया कि शुरुआती स्तर की भर्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं. क्योंकि, कंपनियों ने पारंपरिक प्रोग्रामिंग भूमिकाओं के मुकाबले विशेष एआई कौशल को अधिक प्राथमिकता देना शुरू कर दिया.

AI JOBS INDIA

यह चलन वित्तीय वर्ष 2025-26 में और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया. जब प्रमुख आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की कुल संख्या में गिरावट दर्ज करना शुरू किया. भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी TCS ने वित्तीय वर्ष के अंत तक अपने कर्मचारियों की संख्या में 23,000 से अधिक की शुद्ध कमी दर्ज की.

साल 2026 की पहली छमाही में, एआई के कारण जाने वाली नौकरियां सबसे ज्यादा एडटेक (21.67%) और फिनटेक (14.73%) सेक्टर में रहीं. जिससे ये दोनों भारत में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्र बन गए.

एआई नौकरियों में आई भारी तेजी

  • इसी समय, एआई प्रोफेशनल्स की मांग अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एआई इंडेक्स से पता चलता है कि भारत में एआई टैलेंट की मांग वैश्विक औसत से लगभग 2.5 गुना अधिक है.
  • जनवरी 2023 में कुल नौकरियों में एआई से जुड़े पदों की हिस्सेदारी सिर्फ 2.9% थी. यह हिस्सेदारी मार्च 2025 तक बढ़कर 6.5% हो गई. जुलाई 2026 तक 16% तक पहुंच गई. यह दर्शाती है कि कंपनियों की प्राथमिकताएं कितनी तेजी से बदली हैं.
  • साल 2023 में भारत में करीब 3.5 लाख एआई प्रोफेशनल्स थे. साल 2024 तक यह संख्या बढ़कर 4.2 लाख हो गई. लेकिन, नैसकॉम और डेलॉयट के अनुसार, इंडस्ट्री की मांग पहले ही 6 लाख को पार कर चुकी थी. जिससे योग्य टैलेंट की 50% कमी पैदा हो गई.
  • पारंपरिक पदों पर छंटनी के बावजूद, नैसकॉम की ‘स्ट्रेटेजिक रिव्यू 2026’ का अनुमान है कि भारतीय टेक्नोलॉजी क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2026 में शुद्ध रूप से 1.35 लाख नई नौकरियां जोड़ीं, जिससे इस उद्योग में काम करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 60 लाख पहुंच गई है.
AI JOBS INDIA

AI नए व्यवसायों को जन्म देगा

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान दौर पूरी तरह से नौकरियों के संकट का नहीं. कर्मचारियों के पुनर्गठन का दौर है. प्रधानमंत्री कार्यालय में पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) राजेश पंत ने ईटीवी भारत को बताया कि एआई को एक ऐसी बुनियादी तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए जिसका उपयोग हर क्षेत्र में होगा.

पंत ने कहा, “एआई बिजली की तरह एक सामान्य उपयोग वाली तकनीक है और हर क्षेत्र में इसके उपयोग के तरीके सामने आएंगे. भविष्य की नौकरियों में एआई ऑडिटर, एआई गवर्नेंस विशेषज्ञ और एआई-आधारित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ जैसे पद शामिल होंगे.”

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में साइबर कानून, बौद्धिक संपदा (IP) और मीडिया कानून विशेषज्ञ तथा आईसीएएनएन (ICANN) वर्किंग ग्रुप की सदस्य डॉ. कार्णिका ए. सेठ ने कहा कि एआई-कुशल पेशेवरों की मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि हमारी शिक्षा प्रणाली उस गति से उनकी आपूर्ति नहीं कर पा रही है.

उन्होंने ईटीवी भारत से कहा, “एआई कौशल वाली नौकरियों की मांग लगातार बढ़ रही है. हमारी शिक्षा व्यवस्था को इस मांग के अनुसार खुद को ढालना होगा ताकि युवा उद्योग के लिए तैयार हो सकें. यह सच है कि छंटनी भी हो रही है, लेकिन इसका असर क्लर्क और रिसर्च से जुड़े पारंपरिक कामों पर पड़ेगा, न कि उन नौकरियों पर जिनमें इंसानी समझ, बुद्धिमत्ता और सलाह की जरूरत होती है.”

डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण हो रहा है कौशल

‘टीमलीज एडटेक’ के अनुसार, नियोक्ता अब पारंपरिक डिग्री-आधारित भर्ती के बजाय कौशल-प्रधान हायरिंग मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं. लगभग 73% कंपनियां अब पारंपरिक एंट्री-लेवल कोडिंग पदों के मुकाबले एआई मार्केटिंग एसोसिएट और एआई चैटबॉट सपोर्ट इंजीनियर जैसी एआई-केंद्रित भूमिकाओं के लिए उम्मीदवारों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं.

सरकारी अनुमानों से पता चलता है कि भारत में वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची वार्षिक एआई भर्ती दर लगभग 33% है. जबकि गिटहब (GitHub) पर वैश्विक एआई परियोजनाओं में भारतीय डेवलपर्स का योगदान 19.9% है, जो वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है.

सबसे बड़ी चुनौती

चिंता की बड़ी बात केवल छंटनी नहीं है, बल्कि एआई के लिए तैयार कुशल टैलेंट की भारी कमी होना है. नैसकॉम (NASSCOM), मैकिन्से और नीति आयोग के एक संयुक्त अनुमान में चेतावनी दी गई है कि यदि कर्मचारियों ने तेजी से अपने कौशल को नहीं सुधारा, तो भारत को 2026 के अंत तक 14 लाख एआई प्रोफेशनल्स की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

भविष्य की बात करें तो रिपोर्ट का अनुमान है कि साल 2031 तक लगभग 20 लाख पारंपरिक आईटी और बीपीओ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, भले ही एआई इंजीनियरों, मशीन लर्निंग विशेषज्ञों और डेटा पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही हो.

यह बदलाव एक बड़े वैश्विक रुझान को दर्शाता है. विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि जहां 2030 तक दुनिया भर में 9.2 करोड़ नौकरियां गायब हो सकती हैं, वहीं एआई सहित तकनीकी विकास से 17 करोड़ नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है.

भारत के 315 अरब डॉलर के आईटी उद्योग के लिए संदेश बिल्कुल साफ है.- ‘अब चुनौती केवल नौकरियों के जाने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि कर्मचारी अगली पीढ़ी के एआई-आधारित रोजगार के लिए जरूरी कौशल हासिल कर सकें.’

Read more

Local News