Tuesday, June 16, 2026

अडानी पोर्ट्स ने अर्जेंटीना के पहले एलएनजी एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट का 10-वर्षीय मरीन कॉन्ट्रैक्ट जीतकर आधिकारिक तौर पर दक्षिण अमेरिकी बाजार में प्रवेश किया.

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नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट कंपनी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने दुनिया के नक्शे पर एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है. कंपनी को अर्जेंटीना के पहले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 10 साल का मरीन सर्विसेज कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस डील के साथ ही अडानी ग्रुप ने पहली बार साउथ अमेरिकी मार्केट में कदम रखा है.

यह जानकारी कंपनी ने सोमवार, 8 जून 2026 को एक सरकारी बयान में साझा की.

पार्टनरशिप और प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
यह कॉन्ट्रैक्ट अडानी पोर्ट्स की विदेशी सहायक कंपनी ‘अडानी हार्बर इंटरनेशनल एफजेडसीओ’ ने अर्जेंटीना के ‘मेरिडियन ग्रुप’ के साथ मिलकर एक ग्लोबल टेंडर के जरिए जीता है. इस काम को जमीन पर उतारने के लिए दोनों ने मिलकर ‘मेरिडियन ट्रांसपोर्ट्स मैरिटिमॉस एस.ए.’ नाम की एक कंपनी बनाई है. इसमें अडानी ग्रुप की 51% और मेरिडियन ग्रुप की 49% हिस्सेदारी है. यह कॉन्ट्रैक्ट ‘सदन एनर्जी एस.ए.’ (SESA) कंपनी द्वारा दिया गया है, जो ‘गोलर एलएनजी’ और ‘पैन अमेरिकन एनर्जी’ का एक साझा वेंचर है.

क्या काम करेगी अडानी की कंपनी?
इस समझौते के तहत, अडानी और मेरिडियन का यह ग्रुप समुद्र में एलएनजी से जुड़े जहाजों को सुरक्षित रास्ता और सेवाएं देगा. इसके मुख्य काम होंगे:

  • एलएनजी लेकर आने-जाने वाले बड़े जहाजों के लिए टगबोट (मददगार नावें) चलाना.
  • समुद्र के बीच में जरूरी सामान की सप्लाई और लॉजिस्टिक्स संभालना.
  • जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों (क्रू) को सुरक्षित लाने और ले जाने की जिम्मेदारी.

इस काम को पूरा करने के लिए कंपनी 6 आधुनिक जहाजों का बेड़ा तैनात करेगी, जिसमें 4 शानदार टगबोट, 1 एंकर हैंडलिंग जहाज और 1 क्रू बोट शामिल है.

कहां होगा काम और कब होगी शुरुआत?
यह प्रोजेक्ट अर्जेंटीना के रियो नीग्रो प्रांत में स्थित ‘सैन मटियास गल्फ’ के पास समंदर में चलाया जाएगा. यहां ‘जनरल सैन मार्टिन पाइपलाइन’ के जरिए गैस लाई जाएगी. इस गैस को समुद्र में तैरते हुए एक खास जहाज (FLNG Vessel) ‘हिल्ली एपिसोडो’ पर रखकर लिक्विड (एलएनजी) में बदला जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट का कमर्शियल ऑपरेशन सितंबर 2027 से शुरू होने की तैयारी है.

  • भारत और अडानी के लिए इसका महत्व
    गैस का उत्पादन: अपने पहले फेज में यह प्रोजेक्ट हर साल 2.45 मिलियन टन एलएनजी तैयार करेगा. इसका मतलब है कि सालभर में करीब 28 बड़े जहाज गैस लेकर दुनिया भर में रवाना होंगे.
  • भारत को बड़ी मदद: अर्जेंटीना अब दुनिया में गैस का बड़ा सप्लायर बन रहा है. साल 2027 से भारत को हर साल 10 मिलियन टन तक एलएनजी भेजने की तैयारी है, जिसमें यह प्रोजेक्ट बड़ी भूमिका निभाएगा.
  • अडानी का दबदबा: इस नए देश में एंट्री के साथ ही अडानी पोर्ट्स का मरीन बिजनेस अब दुनिया के 12 देशों में फैल चुका है.

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