रांची स्थित राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (सर्ड) में सोमवार से पंचायती राज संस्थाओं और समुदाय आधारित संगठनों के बीच बेहतर संस्थागत समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला में विभिन्न जिलों के उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, मुखिया तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है।
समन्वय से मजबूत होगा ग्रामीण विकास
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पंचायतों और समुदाय आधारित संगठनों के बीच मजबूत सहयोग ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य गांवों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना, आजीविका के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
महिलाओं की भागीदारी को बताया अहम
मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुसार, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समृद्ध झारखंड की कल्पना अधूरी है। उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत ग्राम सभा के सहायक सचिव पद पर महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
बिरसा हरित ग्राम योजना का दिया उदाहरण
दीपिका पांडेय सिंह ने बिरसा हरित ग्राम योजना को मनरेगा और स्वयं सहायता समूहों के बीच सफल समन्वय का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इसी तरह अन्य विकास योजनाओं में भी विभागों और सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हों और ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
पर्यटन की संभावनाओं पर भी दिया जोर
मंत्री ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों के लिए भी विशेष पहचान रखता है। यदि पंचायतें, स्वयं सहायता समूह और समुदाय आधारित संगठन मिलकर कार्य करें, तो पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए CRISP की ओर से एक रिपोर्ट तैयार की गई है। राज्य सरकार विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
कार्यशाला में CRISP के सदस्य एवं पूर्व आईएएस अधिकारी एन.एन. सिन्हा, जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सीईओ) अनन्य मित्तल, पंचायती राज विभाग की निदेशक बी. राजेश्वरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


