रांची: झारखंड में जेटेट परीक्षा 2026 में भाषा विवाद को सुलझाने के लिए बनी कमेटी की आज पहली बैठक हुई. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, सुदिव्य कुमार सोनू, योगेंद्र प्रसाद शामिल हुए.
करीब दो घंटे से अधिक चली इस बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि कमेटी ने जब 18 मई को बैठक बुलाने का फैसला लिया था तब उन्होंने एक प्रश्नावली के माध्यम से कुछ सवालों का जवाब विभागों से मांगा था. जिसमें से कुछ प्रश्न इस तरह के थे कि वर्ष 2012 तक इस राज्य में किस आधार पर भोजपुरी, मगही और अंगिका क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल थी और वर्ष 2025 में जब जेटेट के लिए नई नियमावली बनाई गई तो किस आधार पर इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर कर दिया गया?
वित्त मंत्री ने कहा कि बेहद महत्वपूर्ण सवाल होते हुए भी विभाग के अधिकारी इन सवालों का ठोस जवाब कमेटी के सामने नहीं दे पाएं. कमेटी ने आज की बैठक में अधिकारियों से राज्य की सभी भाषाओं, उस भाषा को पढ़ने वाले छात्रों और पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या का पूरा ब्यौरा अगले बैठक से पहले देने को कहा है ताकि नई जेटेट नियमावली बनाने के आधार का पता चल सके.
कमेटी की अगली बैठक शुक्रवार 22 मई को होने की सूचना सार्वजनिक करते हुए राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्तमान में जेटेट की प्रक्रिया चल रही है ,उसमें भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा भाषियों को मौका मिलेगा या नहीं, इस पर वह कुछ नहीं कह सकते हैं.
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की की मांग और 2011 में जेटेट को लेकर सरकार के संकल्प 1632/2011 की प्रति उन्हें मिली है. लोकतंत्र में सभी को अपनी बात और मंतव्य देने का अधिकार है. कमेटी उनकी सलाह पर भी बैठक के दौरान चर्चा करेगी.
वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि आज की पहली बैठक काफी सार्थक रही है. बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वह भाषा विवाद से जुड़े सभी जानकारी और तथ्यों को अगली बैठक में कमेटी के सामने प्रस्तुत करें. वहीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि नई नियमावली में कहां-कहां सुधार की जरूरत है. इस पर विभाग से रिपोर्ट तलब किया गया है.
जेटेट भाषा विवाद का मुद्दा तब राज्य में गरम हो गया जब वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार की कैबिनेट ने जेटेट 2026 के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी. इस नियमावली के अनुसार, राज्य के कई अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली भोजपुरी, मगही, अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर कर दिया गया. जबकि ये भाषाएं 2016 के जेटेट परीक्षा के लिए क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल थी.
पलामू, गढ़वा, गोड्डा, देवघर, दुमका सहित बड़े भू-भाग में लोगों द्वारा बोली जाने वाली इन भाषाओं को जेटेट 2026 के लिए क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर कर दिए जाने पर कांग्रेस और राजद कोटे के मंत्रियों ने नाराजगी जताई थी. उसके बाद इस विवाद का हल निकालने के लिए मुख्यमंत्री ने पांच मंत्रियों की कमेटी बनाई, जिसकी पहली बैठक आज हुई.


