Tuesday, June 16, 2026

सेंसेक्स 719 और निफ्टी 243 अंक टूटकर बंद हुए.

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मुंबई: वैश्विक बाजारों में चौतरफा गिरावट और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण घरेलू शेयर बाजार सोमवार को भारी बिकवाली का शिकार हो गया. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,524.26 के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 924.4 अंक तक टूट गया था. 50 शेयरों पर आधारित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी भी 243.70 अंक यानी 1.04 प्रतिशत फिसलकर 23,123 के स्तर पर बंद हुआ.

दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन
नुकसान वाले शेयर्स: बिकवाली के दबाव में इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) प्रमुख रूप से घाटे में रहे.

मुनाफे वाले शेयर्स: विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और भारती एयरटेल के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और ये बढ़त के साथ बंद हुए.

गिरावट के तीन प्रमुख आर्थिक कारण
कच्चे तेल में उछाल: इजरायल और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए मिसाइल हमलों से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 4.10 प्रतिशत की छलांग लगाकर 96.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो भारत के व्यापार घाटे के लिए नकारात्मक है.

ग्लोबल टेक सेक्टर में सुधार: वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने से अमेरिकी बाजारों (खासकर नैस्डैक) में भारी गिरावट आई, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली: एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कारोबारी सत्र में ₹8,776.25 करोड़ मूल्य के शेयरों की आक्रामक बिकवाली की, जिससे बाजार की तरलता पर दबाव बना.

वैश्विक बाजारों का परिदृश्य
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक रिकॉर्ड 8.29 प्रतिशत और जापान का निक्केई 3.85 प्रतिशत तक लुढ़क गया. यूरोपीय बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होती और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी.

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