रांची: सहायक शिक्षक नियुक्ति से जुड़े एक अवमानना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी है। प्रदुमन कुमार साहू और अन्य की ओर से दायर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 17 अक्टूबर 2023 को दिए गए हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप संबंधित याचिकाकर्ताओं के दावों की दोबारा समीक्षा की गई। पुनर्विचार प्रक्रिया में उनके प्राप्त अंकों की तुलना संबंधित श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों के अंकों से की गई।
दोबारा जांच में क्या सामने आया?
राज्य सरकार के अनुसार, पुनर्विचार के दौरान पाया गया कि याचिकाकर्ताओं के अंक उनकी संबंधित श्रेणी में अंतिम चयन पाने वाले उम्मीदवारों के अंकों से कम हैं। इसी आधार पर सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति के उनके दावे को स्वीकार नहीं किया गया।
सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
हाईकोर्ट ने अवमानना कार्रवाई क्यों खत्म की?
राज्य का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने माना कि पूर्व आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ताओं के मामलों पर पुनर्विचार किया जा चुका है। ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही आगे जारी रखने का आधार नहीं रह गया है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध चल रही अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी और मामले का निपटारा कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के लिए आगे का रास्ता खुला
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं के लिए कानूनी विकल्प खुला रखा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे पुनर्विचार के बाद उनके खिलाफ जारी किए गए आदेशों को कानून में उपलब्ध उचित प्रक्रिया के माध्यम से चुनौती दे सकते हैं।
इसका मतलब है कि अवमानना मामला समाप्त होने के बावजूद याचिकाकर्ता पुनर्विचार आदेश से असहमति होने पर अलग कानूनी उपाय अपना सकते हैं।
