नई दिल्ली: विदेश में मौजूद संपत्ति या विदेशी आय की जानकारी आयकर रिटर्न में दर्ज नहीं कर पाने वाले छोटे करदाताओं के लिए केंद्र सरकार ने FAST-DS 2026 का प्रस्ताव रखा है। Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme, 2026 का उद्देश्य ऐसे मामलों में स्वैच्छिक अनुपालन का अवसर देना है, जहां विदेशी संपत्ति या आय का खुलासा पहले नहीं हो पाया।
केंद्रीय बजट 2026-27 में इस एकमुश्त, सीमित अवधि वाली योजना का प्रस्ताव रखा गया था। आधिकारिक विधेयक के मुताबिक, योजना उसी तारीख से लागू होगी जिसे केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचित करेगी।
किन लोगों को मिल सकता है फायदा?
FAST-DS मुख्य रूप से उन छोटे करदाताओं को ध्यान में रखकर लाई गई है, जिनसे विदेशी संपत्ति या आय की रिपोर्टिंग में अनजाने में चूक हुई है। इसमें विदेश में नौकरी के दौरान मिले ESOP/RSU, पुराने या कम राशि वाले विदेशी बैंक खाते, विदेश से लौटे लोगों की बचत अथवा अन्य विदेशी परिसंपत्तियों जैसे मामले शामिल हो सकते हैं।
वर्तमान में ऐसे व्यक्ति भी योजना के दायरे में आ सकते हैं जो अब भारत के निवासी नहीं हैं, लेकिन जिस अवधि में विदेशी आय अर्जित हुई या संपत्ति खरीदी गई, उस समय वे भारत के निवासी थे।
दो तरह के मामलों के लिए अलग व्यवस्था
योजना में विदेशी संपत्ति या आय की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग वित्तीय प्रावधान प्रस्तावित हैं।
पहली श्रेणी में ऐसी विदेशी आय या संपत्ति आती है, जिस पर भारत में टैक्स नहीं दिया गया और जिसका पहले खुलासा भी नहीं हुआ। एक तय सीमा तक ऐसे मामलों में 30 फीसदी टैक्स के साथ टैक्स की 100 फीसदी अतिरिक्त राशि का प्रावधान है। यानी प्रभावी भुगतान 60 फीसदी तक हो सकता है।
दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले शामिल हैं, जहां आय पर टैक्स का भुगतान हो चुका है, लेकिन उससे खरीदी गई विदेशी संपत्ति को रिटर्न में रिपोर्ट नहीं किया गया। इसी तरह कुछ ऐसे मामले भी दायरे में हैं, जिनमें संपत्ति उस समय अर्जित की गई थी जब व्यक्ति भारत का निवासी नहीं था। इस श्रेणी के लिए 5 करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर 1 लाख रुपये की निर्धारित फीस का प्रस्ताव है।
घोषणा करने पर क्या राहत मिलेगी?
योजना की निर्धारित शर्तों का पालन करने और आवश्यक टैक्स या फीस जमा करने पर संबंधित मामलों में ब्लैक मनी कानून के तहत जुर्माने और अभियोजन से वैधानिक सुरक्षा देने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह सुविधा योजना में शामिल पात्र मामलों और निर्धारित शर्तों के अधीन होगी। अभियोजन या अपराध से जुड़े कुछ मामलों को योजना से बाहर रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
छह महीने की होगी विशेष विंडो
बजट में FAST-DS को एकमुश्त छह महीने की योजना के रूप में प्रस्तावित किया गया है। हालांकि इसकी वास्तविक शुरुआत और आवेदन की समयसीमा केंद्र सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही तय मानी जाएगी। इसलिए करदाताओं को केवल अनौपचारिक तारीखों के आधार पर घोषणा करने के बजाय आयकर विभाग की अधिसूचना और आधिकारिक दिशानिर्देशों का इंतजार करना चाहिए।
विदेशी संपत्तियों की जानकारी को लेकर सरकार की सख्ती
विदेशी वित्तीय संपत्तियों की रिपोर्टिंग को लेकर आयकर विभाग पहले से ही सूचना साझा करने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहा है। जुलाई 2026 में CBDT ने बताया था कि CRS और FATCA के तहत प्राप्त विदेशी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी अब आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल के AIS में उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि करदाता अपनी रिपोर्टिंग को सही कर सकें।
FAST-DS का व्यापक उद्देश्य ऐसे पुराने या अनजाने में हुए गैर-प्रकटीकरण मामलों को नियमित करने का अवसर देना और छोटे करदाताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाते हुए अनुपालन की ओर लाना है।
