नई दिल्ली: आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) को कई तरह के पारंपरिक उपचारों में शामिल किया जाता रहा है। इसके पौधे की जड़, पत्तियों और दूसरे हिस्सों का अलग-अलग रूप में उपयोग किया जाता है। आधुनिक शोध में भी इसके कुछ जैविक गुणों का अध्ययन हुआ है, हालांकि किसी बीमारी के इलाज के तौर पर इसके प्रभाव को लेकर इंसानों में पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाण हर मामले में उपलब्ध नहीं हैं।
पुनर्नवा को खास तौर पर इसके संभावित डाइयूरेटिक (मूत्रवर्धक), एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसे किसी गंभीर बीमारी की दवा या डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
किडनी और यूरिनरी सिस्टम
पारंपरिक चिकित्सा में पुनर्नवा का इस्तेमाल शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ और सूजन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। इसके मूत्रवर्धक प्रभाव पर शोध हुआ है, जिसके कारण इसे वॉटर रिटेंशन जैसी स्थितियों में उपयोग किए जाने की चर्चा मिलती है।
किडनी स्टोन या पेशाब से जुड़ी समस्या में इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। ऐसी स्थितियों में केवल हर्बल उपचार पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
लिवर के लिए संभावित भूमिका
पुनर्नवा के लिवर पर संभावित प्रभावों को लेकर भी प्री-क्लिनिकल और पारंपरिक चिकित्सा संबंधी अध्ययन हुए हैं। इनमें इसके एंटीऑक्सीडेंट और हेपेटोप्रोटेक्टिव गुणों की जांच की गई है।
हालांकि, पीलिया, फैटी लिवर या किसी अन्य लिवर बीमारी का इलाज केवल पुनर्नवा से करने का दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। लिवर से जुड़ी समस्या होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
सूजन और जोड़ों की परेशानी
कुछ अध्ययनों में पुनर्नवा के विभिन्न अर्क में एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधि देखी गई है। इसी वजह से पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल सूजन और जोड़ों से जुड़ी परेशानियों के लिए किया जाता रहा है।
लेकिन गठिया या लंबे समय से चले आ रहे दर्द में इसे उपचार का विकल्प मानने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
दिल की सेहत को लेकर क्या पता है?
पुनर्नवा के कार्डियोवैस्कुलर प्रभावों पर भी शोध हुआ है। इसके एंटीऑक्सीडेंट और मूत्रवर्धक गुणों को संभावित रूप से हृदय स्वास्थ्य से जोड़ा गया है।
फिर भी हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज या शरीर में असामान्य सूजन जैसी समस्या में डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को छोड़कर पुनर्नवा का इस्तेमाल करना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता।
वजन और मेटाबॉलिज्म
कुछ शोधों में पुनर्नवा के अर्क और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन किया गया है। इसी आधार पर वजन प्रबंधन में इसके इस्तेमाल की चर्चा होती है।
हालांकि, वजन कम करने के लिए पुनर्नवा को प्रमाणित उपचार मानने के लिए पर्याप्त मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और विशेषज्ञ की सलाह अधिक महत्वपूर्ण हैं।
त्वचा और सूजन से जुड़ी समस्याएं
इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण पुनर्नवा के त्वचा संबंधी संभावित उपयोगों पर भी अध्ययन किए गए हैं। लेकिन मुंहासे, एक्जिमा या अन्य त्वचा रोगों के उपचार के लिए इसके प्रभाव को लेकर ठोस चिकित्सकीय प्रमाण सीमित हैं।
सांस से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल
आयुर्वेदिक परंपरा में पुनर्नवा का इस्तेमाल कुछ श्वसन संबंधी परेशानियों में भी किया जाता है। हालांकि अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों में इसे डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।
एनीमिया के दावे पर सावधानी जरूरी
पुनर्नवा और एनीमिया को लेकर भी कुछ अध्ययन उपलब्ध हैं, लेकिन किसी व्यक्ति में खून की कमी का कारण पता लगाना जरूरी है। आयरन की कमी, विटामिन की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण एनीमिया हो सकता है।
इसलिए एनीमिया होने पर सिर्फ किसी जड़ी-बूटी का सेवन करने के बजाय हीमोग्लोबिन और आवश्यक जांच के आधार पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी
पुनर्नवा प्राकृतिक जड़ी-बूटी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या हर बीमारी में प्रभावी होगी। खासकर किडनी, लिवर, हृदय या अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसे लेने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर्बल उत्पादों की मात्रा, शुद्धता और अन्य दवाओं के साथ उनकी प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। पुनर्नवा को किसी बीमारी के इलाज का प्रमाणित विकल्प न समझें और चल रही दवाओं को चिकित्सकीय सलाह के बिना बंद न करें।
