रांची, 8 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन के बाद झारखंड के सरकारी चिकित्सकों ने अपने आंदोलन के तत्काल कार्यक्रमों को तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (झासा) ने शोक के कारण विरोध कार्यक्रमों में अस्थायी बदलाव किया है। हालांकि, 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय फिलहाल कायम है।
9 अक्टूबर का काला बिल्ला कार्यक्रम टला
झासा के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 9 अक्टूबर को सरकारी चिकित्सकों को काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराना था। रूपी सोरेन के निधन के बाद संघ ने यह कार्यक्रम स्थगित करने का फैसला किया है।
इसके अलावा अगले दो दिनों के लिए प्रस्तावित जनसंपर्क अभियान समेत आंदोलन से जुड़े अन्य तत्काल कार्यक्रम भी तीन दिन तक नहीं होंगे। इस दौरान चिकित्सक मुख्यमंत्री और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करेंगे।
मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा
झासा ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कार्यक्रमों को रोकने का फैसला केवल शोक के कारण लिया गया है। चिकित्सकों की लंबित मांगों और आंदोलन की आगे की रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
संघ के अनुसार तीन दिन बाद चरणबद्ध आंदोलन पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ेगा।
22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार का फैसला
सरकार की ओर से लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में झासा ने 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर रखी है। संघ के मुताबिक इसमें राज्यभर के करीब 1,200 सरकारी चिकित्सक शामिल हो सकते हैं।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एसीपी, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, संविदा नियुक्ति नियमों में बदलाव और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मुद्दों का समाधान शामिल है।
सरकार से समयबद्ध समाधान की मांग
झासा का कहना है कि चिकित्सकों से जुड़े सेवा मामलों का समाधान लंबे समय से लंबित है। संघ चाहता है कि सरकार इन मुद्दों पर समयबद्ध तरीके से निर्णय ले।
फिलहाल रूपी सोरेन के निधन के कारण चिकित्सकों ने तीन दिनों के लिए विरोध गतिविधियां रोक दी हैं, लेकिन 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम यथावत रखा गया है।
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