Thursday, October 8, 2026

GST Council के बड़े फैसले: गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने की सिफारिश, 3 दिन में 90% रिफंड का लक्ष्य.

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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: जीएसटी काउंसिल ने टैक्स व्यवस्था को कारोबारियों के लिए आसान बनाने और अनुपालन का बोझ घटाने की दिशा में कई अहम सुधारों की सिफारिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं बैठक में गिरफ्तारी के प्रावधान में बदलाव, अभियोजन की सीमा बढ़ाने, तेज रिफंड और आसान GST रजिस्ट्रेशन समेत कई प्रस्तावों पर सहमति बनी।

GST मामलों में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने की सिफारिश

काउंसिल ने GST से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी की मौजूदा शक्ति को हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही अभियोजन शुरू करने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसका मतलब है कि 5 करोड़ रुपये से कम की कर राशि वाले मामलों में अभियोजन की कार्रवाई नहीं होगी, जबकि मौजूदा व्यवस्था में यह सीमा 1 करोड़ रुपये थी।

90% GST रिफंड तीन कार्यदिवस में देने का लक्ष्य

काउंसिल ने कारोबारियों की कार्यशील पूंजी को राहत देने के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत करीब 90 प्रतिशत रिफंड दावों को तीन कार्यदिवस के भीतर प्रोसेस करने का लक्ष्य रखा गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी ऐसे करदाता को अनावश्यक रूप से इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए, जिसने अपनी ओर से कर संबंधी जिम्मेदारी पूरी की है। इसी सोच के तहत रिफंड व्यवस्था को ज्यादा प्रणाली-आधारित बनाने की सिफारिश की गई है।

छोटे मामलों में नोटिस की सीमा भी बदलेगी

जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने के लिए 10,000 रुपये तक की रकम से जुड़े मामलों में नोटिस नहीं भेजने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सीमा से नीचे के लंबित नोटिसों को वापस लेने की भी सिफारिश की गई है।

इसके अलावा सामान्य अधिकतम जुर्माने की सीमा को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव है।

ई-वे बिल जांच के नियम होंगे आसान

सामानों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए ई-वे बिल से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। काउंसिल के मुताबिक किसी वाहन को केवल विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर ही रोका जाएगा और इसके लिए ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी।

ट्रांजिट राज्य में सामान्य तौर पर माल को रोकने की कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि जरूरी दस्तावेज या ई-वे बिल उपलब्ध नहीं होने पर जांच की जा सकेगी।

काउंसिल ने यह भी सिफारिश की है कि ट्रांजिट के दौरान सेक्शन 130 के तहत माल जब्त करने की कार्रवाई नहीं की जाए।

फेसलेस GST प्रशासन की दिशा में कदम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भविष्य में केंद्रीयकृत और फेसलेस GST प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। प्रस्तावित व्यवस्था में करदाताओं से जुड़े कई काम एक ही विंडो से करने की योजना है।

इसमें रिटर्न की जांच, ऑडिट, आकलन, अपील, करदाता सेवाएं और शिकायतों के समाधान जैसे कार्य शामिल किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग GST कार्यालयों में करदाताओं की भागदौड़ और प्रत्यक्ष संपर्क को कम करना है।

ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन

काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए सरल GST रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छोटे विक्रेताओं को हर राज्य में अलग से भौतिक कार्यालय खोलने की जरूरत नहीं होगी। कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को कारोबार के मुख्य स्थान के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा और पंजीकरण की प्रक्रिया आसान होगी।

इसका मकसद छोटे कारोबारियों को दूसरे राज्यों में कारोबार बढ़ाने के लिए अनुपालन संबंधी मुश्किलों को कम करना है।

सेवाओं पर GST को लेकर भी कई प्रस्ताव

GST काउंसिल ने विभिन्न सेवाओं के लिए टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने के कई प्रस्ताव रखे हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन आधारित यात्री परिवहन और वाहन किराये की सेवाओं के लिए 5 प्रतिशत GST विकल्प शामिल है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दी जाने वाली डिलीवरी सेवाओं के लिए भी 5 प्रतिशत GST का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम और बागडोगरा में हेलीकॉप्टर यात्री परिवहन के लिए छूट की सिफारिश की गई है।

बीज भंडारण और कॉफी क्योरिंग जैसी सेवाओं को भी प्रस्तावित GST छूट के दायरे में लाने की बात कही गई है। R&D सेवाओं के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया आसान करने तथा कुछ शिपिंग, हाईवे और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े टैक्स प्रावधानों में राहत का प्रस्ताव भी रखा गया है।

छोटे कारोबार और करदाताओं पर फोकस

कुल मिलाकर 57वीं GST काउंसिल बैठक में किए गए प्रस्तावों का फोकस अनुपालन को आसान बनाने, रिफंड में तेजी लाने और कारोबारियों के लिए टैक्स प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने पर रहा।

हालांकि इनमें से कई बदलाव सिफारिशों के रूप में हैं और इन्हें लागू करने के लिए संबंधित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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