लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर 8 अक्टूबर को पहली बार लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पार्टी की उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान पहले ही उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह चुके हैं। हालांकि, यूपी में पार्टी किस दल के साथ गठबंधन करेगी, इसको लेकर अभी कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है।
प्रयागराज से चुनावी गतिविधियों को गति
चिराग पासवान ने हाल में प्रयागराज में आयोजित ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम के जरिए उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया था। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि लोजपा (रामविलास) प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
इसके बाद पार्टी की ओर से प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
एनडीए के साथ रहते हुए यूपी में अलग तैयारी
लोजपा (रामविलास) केंद्र और बिहार में एनडीए का हिस्सा है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश को लेकर पार्टी ने फिलहाल अपनी अलग चुनावी तैयारी का संकेत दिया है।
गठबंधन के सवाल पर चिराग पासवान ने कहा था कि पार्टी सभी सीटों पर अपनी तैयारी रख रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आगे गठबंधन होगा या नहीं और यदि होगा तो उसका स्वरूप क्या होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर लखनऊ में कार्यक्रम
8 अक्टूबर को लखनऊ में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि का आयोजन पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यक्रम होगा। पार्टी की ओर से पहली बार राज्य में इस स्तर पर पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
लोजपा (रामविलास) पिछले कुछ समय से यूपी में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी का फोकस संगठन विस्तार और विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने पर भी है।
दलित मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कई राजनीतिक दल इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं। चिराग पासवान की पार्टी भी राज्य में दलित समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पहचान और संगठन को विस्तार देने पर जोर दे रही है।
बहुजन समाज पार्टी की चुनावी स्थिति में बदलाव के बाद उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति को लेकर विभिन्न दलों की रणनीतियां चर्चा में रही हैं। समाजवादी पार्टी भी पीडीए के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश करती रही है।
2020 के बिहार चुनाव में अलग राह अपना चुके हैं चिराग
चिराग पासवान की राजनीतिक रणनीति में अलग चुनावी रुख का उदाहरण 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला था। उस चुनाव में उनकी पार्टी ने एनडीए से अलग होकर उम्मीदवार उतारे थे और जेडीयू को लेकर आक्रामक चुनावी अभियान चलाया था।
लोजपा को उस चुनाव में एक सीट पर जीत मिली थी। इसके बाद चिराग पासवान की राजनीतिक भूमिका और उनकी पार्टी की रणनीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई थी।
यूपी में कई दलों की दलित राजनीति पर नजर
उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दल सक्रिय हैं। आजाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम समेत कई दल अपने-अपने स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा भी दलित समुदाय के बीच संगठनात्मक और राजनीतिक संपर्क को लेकर अपनी गतिविधियां चलाती रही है।
ऐसे माहौल में लोजपा (रामविलास) की उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का एक हिस्सा बन गई है।
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