नई दिल्ली: सोने की आसमान छूती कीमतों के बावजूद इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भारतीय उपभोक्ताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई. देशभर के सर्राफा बाजारों और शोरूम्स में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया. उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची कीमतों ने वॉल्यूम पर थोड़ा असर जरूर डाला, लेकिन मूल्य के मामले में इस साल के आंकड़े पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते नजर आ रहे हैं.
ऐतिहासिक कीमतों के बीच मजबूत मांग
पिछले साल अक्षय तृतीया पर सोने का भाव लगभग 90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो इस साल बढ़कर करीब 1,54,000 से 1,58,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. अखिल भारतीय ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने बताया कि देश भर में लगभग 18 से 20 टन सोने का व्यापार हुआ है. उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत में सुबह से ही तेजी थी, जबकि महाराष्ट्र और पश्चिम भारत में दोपहर 2 बजे के बाद ग्राहकों का हुजूम उमड़ा, जिसके चलते शोरूम देर रात तक खुले रहे.”
बदलते रुझान: हल्के वजन और डायमंड ज्वैलरी की धूम
इस साल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. सोने की उच्च कीमतों के कारण मध्यम वर्ग ने भारी गहनों के बजाय ‘लाइटवेट’ (हल्के वजन) और ‘डेली वियर’ डिजाइनों को प्राथमिकता दी. विशेष रूप से युवाओं और पहली बार खरीदारी करने वालों ने 9K, 14K और 18K कैरेट वाली डायमंड स्टडेड ज्वैलरी में अधिक रुचि दिखाई. कामा ज्वैलरी के एमडी कॉलिन शाह के अनुसार, “युवा पीढ़ी अब निवेश के साथ-साथ व्यावहारिकता को देख रही है, जिससे हल्के और आधुनिक डिजाइनों की बिक्री में 15% की वृद्धि हुई है.”
डिजिटल खरीदारी और क्विक कॉमर्स का जादू
कल्याण ज्वैलर्स जैसे बड़े ब्रांड्स ने इस बार डिजिटल तकनीक का बखूबी फायदा उठाया. स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी के कारण ग्राहकों ने घर बैठे सोने के सिक्के और चांदी के बर्तन मंगवाए. इससे उन कामकाजी लोगों को बड़ी राहत मिली जो शोरूम की भीड़ से बचना चाहते थे.
चांदी और निवेश के अन्य विकल्प
सोने के साथ-साथ चांदी की चमक भी फीकी नहीं रही. सिक्कों, मूर्तियों और बर्तनों की श्रेणी में चांदी की मांग में भारी बढ़त देखी गई. साथ ही, फिजिकल गोल्ड के अलावा ‘डिजिटल गोल्ड’, गोल्ड ईटीएफ (ETF) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में भी निवेशकों ने बड़ी पूंजी लगाई.
कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया 2026 ने यह साबित कर दिया है कि भारतीयों के लिए सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है. कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद भी खरीदारी का यह जज्बा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है.


