पटना: बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अवकाश (छुट्टी) स्वीकृति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब अवकाश के लिए केवल विभाग द्वारा निर्धारित आवेदन प्रपत्र ही मान्य होगा। किसी अन्य प्रारूप या सामान्य आवेदन पत्र पर की गई छुट्टी की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
विभाग ने इस संबंध में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और संबंधित अधिकारियों को नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
किन कर्मचारियों पर लागू होंगे नए नियम?
नई व्यवस्था सरकारी विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक, सहायक शिक्षक, वरिष्ठ शिक्षक और बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त विद्यालय अध्यापकों पर लागू होगी। हालांकि, स्थानीय निकायों के अंतर्गत नियुक्त नियोजित शिक्षकों को फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
अवकाश स्वीकृति की जिम्मेदारी तय
शिक्षा विभाग ने विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों के लिए अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है।
- सहायक शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक और बीपीएससी से नियुक्त अध्यापकों की कैजुअल लीव (CL) संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्वीकृत करेंगे।
- यदि प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक या प्रभारी प्रधानाध्यापक को अवकाश चाहिए, तो उन्हें संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) से अनुमति लेनी होगी।
- लंबी अवधि के अवकाश के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन संबंधित अधिकारी के माध्यम से अग्रसारित किया जाएगा।
डिजिटल रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत अवकाश स्वीकृत होने के बाद उसका रिकॉर्ड दो स्थानों पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
- शिक्षक की सर्विस बुक में अवकाश का विवरण दर्ज किया जाएगा।
- साथ ही विभाग के ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर भी इसकी ऑनलाइन प्रविष्टि की जाएगी।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य अवकाश संबंधी पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो
विभाग ने अधिकारियों और विद्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया है कि किसी भी शिक्षक की छुट्टी स्वीकृत करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालय में पढ़ाई बाधित न हो। अवकाश देने से पहले उपलब्ध शिक्षकों की संख्या और वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था का आकलन करना आवश्यक होगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई प्रक्रिया के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


