Thursday, November 5, 2026

दिवाली पर महंगाई की मार, मिट्टी के दीये और घरौंदे हुए महंगे; पिछले साल से करीब दोगुने हुए दाम

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रांची, 5 नवंबर 2026: दीपावली को लेकर रांची के बाजार सज चुके हैं। मिट्टी के दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, खिलौने और घरौंदे खरीदने के लिए दुकानें तैयार हैं। हालांकि, इस बार इन पारंपरिक सामानों की बढ़ी कीमतों ने ग्राहकों का बजट बिगाड़ दिया है। कई वस्तुओं के दाम पिछले साल की तुलना में करीब दोगुने बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, दूर-दराज से सामान लेकर पहुंचे कुम्हार और छोटे दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।

200 रुपये सैकड़ा बिक रहे मिट्टी के दीये

बाजार में मिट्टी के दीये 200 रुपये सैकड़ा बिक रहे हैं। ग्वालिन की कीमत 50 से 100 रुपये तक है, जबकि बच्चों के मिट्टी के खिलौनों की शुरुआती कीमत 30 रुपये है। मिट्टी के हाथी, तोता, घोड़ा, शेर और बाघ जैसे खिलौने 50 रुपये में मिल रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, इस साल इन सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां 300 से 5 हजार रुपये तक

मूर्ति विक्रेता बजरंग सिंह ने बताया कि वह पिछले 10-12 वर्षों से कचहरी रोड पर मिट्टी की मूर्तियां बेच रहे हैं। इस बार गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों की कीमत 300 रुपये से शुरू होकर 5 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

उनके मुताबिक, पिछले साल की तुलना में मूर्तियों के दाम करीब दोगुने हो गए हैं। जो मूर्ति पहले 150 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब 300 रुपये हो गई है।

लकड़ी के घरौंदे 300 से 750 रुपये तक

रातू रोड की दुकानदार सीता देवी ने बताया कि इस साल लकड़ी के घरौंदे 300 से 750 रुपये तक बिक रहे हैं। वर्ष 2025 में इनकी कीमत मौजूदा दरों से करीब 50 रुपये कम थी। दीपावली के दौरान घरौंदों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन कीमतों में इजाफे के कारण ग्राहक खरीदारी से पहले सोच-विचार कर रहे हैं।

दीपावली पर ही होती है करंज तेल की बिक्री

सोनी देवी ने बताया कि दीपावली के मौके पर करंज तेल की मांग रहती है। फिलहाल बाजार में इसकी कीमत 200 रुपये प्रति लीटर है। उन्होंने कहा कि वह साल में केवल दीपावली के समय ही करंज तेल बेचती हैं।

180 किलोमीटर दूर से 6 हजार रुपये खर्च कर पहुंचे कुम्हार

बोकारो जिले से कुम्हार इस बार भी हजारों मिट्टी के घरौंदे लेकर रांची के मोरहाबादी बाजार पहुंचे हैं। उनके घरौंदों की कीमत 250 से 400 रुपये तक रखी गई है।

कुम्हारों ने बताया कि वे रांची से करीब 180 किलोमीटर दूर से सामान लेकर आए हैं। यहां तक पहुंचने में लगभग 6 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसके बावजूद बाजार में ग्राहकों की भीड़ कम है। दुकानदारों का कहना है कि बिक्री कमजोर रहने से लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

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