पटना | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
बिहार में सरकारी नौकरियों और रोजगार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन सरकार में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया है कि उस दौरान युवाओं को रोजगार देने के लिए बड़े स्तर पर नियुक्तियों की तैयारी की गई थी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में भी 1.30 लाख से अधिक पदों पर बहाली की योजना बनाई गई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबंधित फाइल रोक दी थी।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में 10 लाख सरकारी नौकरी देने के वादे, शिक्षक भर्ती और नियुक्ति पत्र वितरण का उल्लेख करते हुए महागठबंधन सरकार के कार्यकाल को युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।
10 लाख सरकारी नौकरी के वादे को लेकर क्या बोले तेजस्वी?
तेजस्वी यादव के अनुसार, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजद ने सरकार बनने पर 10 लाख पक्की सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस लक्ष्य को असंभव बताते हुए सवाल उठाया था कि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के वेतन का खर्च कैसे उठाया जाएगा।
तेजस्वी का कहना है कि सत्ता से बाहर रहने के बावजूद युवाओं से किया गया यह वादा उनके लिए प्राथमिकता बना रहा। उन्होंने दावा किया कि 2022 में महागठबंधन सरकार बनने के बाद उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।
2022 में सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया पर जोर
तेजस्वी यादव ने बताया कि अगस्त 2022 में महागठबंधन सरकार बनने के बाद उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने की दिशा में काम किया।
उनके मुताबिक, शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-1 और TRE-2 की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचनाएं जारी की गईं। उन्होंने दावा किया कि परीक्षाएं बिना पेपर लीक के आयोजित हुईं और परिणाम भी समय पर घोषित किए गए।
तेजस्वी ने बीपीएससी के माध्यम से तीन लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली होने की बात कही। उन्होंने इसे 10 लाख नौकरी देने के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया।
गांधी मैदान में 1,20,336 अभ्यर्थियों को मिले थे नियुक्ति पत्र
तेजस्वी यादव ने 2 नवंबर 2023 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम में एक साथ 1,20,336 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे।
उन्होंने दावा किया कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्ति पत्र वितरण का यह देश का पहला आयोजन था। तेजस्वी ने कहा कि उस समय उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिया था।
उनके बयान के मुताबिक, शिक्षक नियुक्ति के साथ अन्य विभागों में भी रिक्तियों को भरने की तैयारी चल रही थी।
स्वास्थ्य विभाग में 1.30 लाख से अधिक पदों पर बहाली का दावा
तेजस्वी यादव ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति को 10 लाख नौकरियों के लक्ष्य का पहला चरण माना गया था। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग में पब्लिक हेल्थ कैडर तैयार करने की योजना बनाई गई थी।
उनके अनुसार, इस योजना के तहत 1.30 लाख से अधिक पदों पर नियुक्ति की तैयारी थी और इसके लिए विस्तृत खाका तैयार किया गया था। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि संबंधित फाइल तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्तर पर रोक दी गई।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में फाइल, पदवार रिक्तियों या भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना का विवरण उनके बयान में नहीं दिया गया है।
जनवरी 2024 में सरकार बदलने के बाद योजनाएं रुकने का आरोप
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जनवरी 2024 में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होकर एनडीए में लौटने के बाद युवाओं के लिए चल रही नियुक्ति संबंधी पहल प्रभावित हुई।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर नौकरी मांगने वाले अभ्यर्थियों के आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया। तेजस्वी के मुताबिक, विभिन्न प्रदर्शनों में अभ्यर्थियों को लाठीचार्ज और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ये आरोप तेजस्वी यादव के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन पर संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
रोजगार के मुद्दे पर फिर तेज हुई राजनीतिक चर्चा
तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद बिहार में सरकारी नियुक्तियों, भर्ती प्रक्रिया और रोजगार के वादों को लेकर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है।
एक ओर तेजस्वी ने महागठबंधन सरकार के दौरान हुई शिक्षक नियुक्तियों और नियुक्ति पत्र वितरण को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश किया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग में 1.30 लाख से अधिक पदों पर बहाली की योजना रोके जाने का आरोप भी लगाया है।
अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित भर्ती योजना, संबंधित फाइल और पदों की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
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