Monday, November 2, 2026

झारखंड में बाघों की वापसी की तैयारी, पलामू टाइगर रिजर्व में बना 10 विशेषज्ञों का हाईटेक सेल

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पलामू | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News

झारखंड के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने नई पहल की है। पलामू टाइगर रिजर्व में 10 विशेषज्ञों की एक विशेष टाइगर सेल गठित की गई है। यह टीम राज्यभर में बाघों की गतिविधियों, आवाजाही और उनके अनुकूल वन्य पर्यावरण पर नजर रखेगी। विशेषज्ञों की मदद से बाघों की निगरानी को अधिक आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की योजना है।

टाइगर सेल का मुख्यालय बेतला नेशनल पार्क में बनाया गया है। टीम में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जो बाघों की मौजूदगी और उनके आवास से संबंधित जानकारियां जुटाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

AI से लेकर वन्यजीव चिकित्सा तक के विशेषज्ञ शामिल

टाइगर सेल में कुल 10 विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीव विज्ञान, वन क्षेत्र प्रबंधन, ग्रासलैंड, पर्यटक प्रबंधन, गाइड संचालन, वन्यजीव रेस्क्यू और पशु चिकित्सा से जुड़े जानकार शामिल हैं।

इन विशेषज्ञों को संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता का आकलन करने के बाद टीम का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य बाघों की निगरानी, उनके ठिकानों की पहचान और जंगलों में उनके लिए अनुकूल परिस्थितियों का अध्ययन करना है।

वर्ष 2023 में बनी थी टाइगर सेल की योजना

टाइगर फाउंडेशन की वर्ष 2023 में हुई बैठक में विशेष टाइगर सेल गठित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए तैयार किया गया।

प्रशिक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 10 विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी दी गई है। पलामू टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के उप निदेशक प्रजेशकान्त जेना इस सेल की निगरानी करेंगे।

वर्ष 2021 के बाद सात बाघों की आवाजाही दर्ज

झारखंड में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सात बाघों की आवाजाही दर्ज की गई है।

इनमें से कुछ बाघ पलामू से निकलकर हजारीबाग, रांची, खूंटी और जमशेदपुर तक पहुंचे। हालांकि, अब तक किसी बाघिन की मौजूदगी दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थायी आबादी विकसित करने के लिए नर और मादा बाघों की मौजूदगी जरूरी है।

मध्य प्रदेश से दो बाघिन और एक बाघ लाने की योजना

झारखंड में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम पर भी काम किया जा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत मध्य प्रदेश के किसी टाइगर रिजर्व से दो बाघिन और एक बाघ को पलामू लाने की तैयारी है। खबर के अनुसार, इस योजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है।

योजना के मुताबिक, पलामू लाए जाने वाले तीनों बाघों को टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा। वहां उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद उनके संरक्षण और प्रजनन के माध्यम से क्षेत्र में बाघों की आबादी विकसित करने का प्रयास होगा।

वर्ष 2026 के अंत तक बाघों को लाने की तैयारी

टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम के जल्द पलामू पहुंचने की संभावना है। योजना के अनुसार, वर्ष 2026 के अंतिम महीनों तक दो बाघिन और एक बाघ को यहां लाने की तैयारी की जा रही है।

टाइगर सेल के गठन से बाघों की निगरानी, उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाघों के लिए सुरक्षित आवास और अनुकूल वातावरण कितना प्रभावी ढंग से तैयार किया जाता है।

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