चतरा | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
झारखंड के चतरा में जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि फर्जी होल्डिंग रसीद, वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर एक ही दिन में सात जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई। मामला सामने आने के बाद सब रजिस्ट्रार संतोष रजक और कंप्यूटर ऑपरेटर विकास के बयान अलग-अलग हैं। इससे दस्तावेजों की जांच और कार्यालय में जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
दस्तावेजों की जांच को लेकर सब रजिस्ट्रार और ऑपरेटर के अलग-अलग दावे
जिला अवर निबंधन पदाधिकारी संतोष रजक के अनुसार, जमीन की सातों रजिस्ट्री से पहले कंप्यूटर ऑपरेटर ने दस्तावेजों की जांच की थी। दूसरी ओर, ऑपरेटर विकास का कहना है कि उसने ऑनलाइन उपलब्ध खतियान और पंजी टू के आधार पर ही दस्तावेजों का सत्यापन किया था।
विकास ने दावा किया कि पंजी टू, खतियान और केवाला में दर्ज अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी कार्यालय के प्रधान सहायक और सब रजिस्ट्रार की होती है। उसने आरोप लगाया कि पूरे मामले में उसे जिम्मेदार ठहराकर मोहरा बनाया जा रहा है।
ऑपरेटर ने सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों की जांच और निबंधन की पूरी जिम्मेदारी उसी की है, तो फिर अधिकारी की भूमिका और जवाबदेही क्या है? दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों के बाद अब यह जांच का विषय है कि रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
शिकायतकर्ताओं ने कई अधिकारियों को दिया आवेदन
शिकायतकर्ता राहुल देव और नीरज सिन्हा ने संयुक्त रूप से इस मामले में अंचल अधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उपसमाहर्ता, अपर समाहर्ता, उपायुक्त, आयुक्त, मुख्य सचिव, विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री को आवेदन दिया है।
आवेदन में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई जमीन की रजिस्ट्री को रद्द करने और संबंधित जमीन के म्यूटेशन आवेदनों को निरस्त करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने केवाला में दर्ज तथ्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कराने की भी अपील की है। उनका आरोप है कि इस पूरे मामले में कथित रूप से शामिल लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
एक ही रसीद संख्या पर दो अलग-अलग होल्डिंग का आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, विवादित जमीन से जुड़े दस्तावेजों में नगर परिषद की होल्डिंग रसीद को लेकर गंभीर विसंगतियां हैं। उनका दावा है कि रसीद संख्या 269558611072025062417 और होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को जारी दिखाई गई है।
वहीं, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसी रसीद संख्या के साथ होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 पहले से वार्ड 20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर दर्ज है। उनके अनुसार, दोनों दस्तावेजों में राजस्व राशि और राजस्व वर्ष भी समान हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फूलवा देवी के नाम पर जारी रसीद में कथित तौर पर बदलाव कर नाम और होल्डिंग संख्या के कुछ अंकों में फेरबदल किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इसी तरह तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी और बाद में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ताओं ने जमीन की रजिस्ट्री में इस्तेमाल की गई वंशावली पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह वंशावली वार्ड छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा के लेटरहेड पर जारी की गई, जबकि संबंधित जमीन और विक्रेता सत्येंद्र कुमार सिन्हा के पते को लेकर दस्तावेजों में विसंगतियां हैं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित जमीन वार्ड छह के अंतर्गत नहीं आती और विक्रेता भी उस वार्ड के निवासी नहीं हैं। इसके अलावा, रजिस्ट्री में प्रस्तुत होल्डिंग के वार्ड नंबर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर गलत वंशावली के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई और फिर जमीन की रजिस्ट्री की गई। इन दस्तावेजों की वैधता और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया की जांच अब महत्वपूर्ण होगी।
अपर समाहर्ता बोले- प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध
मामले पर अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने गंभीरता जताई है। उनके अनुसार, प्रारंभिक तौर पर जमीन की रजिस्ट्री में इस्तेमाल किए गए दस्तावेज फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। उन्होंने निबंधन कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर रजिस्ट्री कराए जाने की आशंका की जांच जरूरी है।
अपर समाहर्ता ने यह भी कहा कि संबंधित मामले में वार्ड छह के पार्षद को वंशावली जारी करने का अधिकार नहीं था। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीसी ने जांच कमेटी गठित करने का दिया निर्देश
चतरा के उपायुक्त रवि आनंद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में जमीन से संबंधित दस्तावेजों, होल्डिंग रसीद, वंशावली, पावर ऑफ अटॉर्नी और सातों रजिस्ट्री की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित दस्तावेजी गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।
Bharat Superfast News
