रांची: झारखंड में बस परमिट जारी करने और नवीनीकरण की लंबित प्रक्रिया के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बस संचालकों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रही देरी से 200 से अधिक बसों का संचालन बाधित है, जिससे परिवहन व्यवसाय को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
झारखंड प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का दावा है कि पिछले लगभग तीन वर्षों से नए परमिट जारी करने और पुराने परमिटों के नवीनीकरण के मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो रहा है।
एसोसिएशन के अनुसार, परमिट संबंधी लंबित मामलों की वजह से कई बसें परिचालन में नहीं आ पा रही हैं। इसके बावजूद वाहन मालिकों को मोटर वाहन कर, बीमा प्रीमियम और अन्य नियमित खर्च वहन करने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) की कार्यप्रणाली अपेक्षित गति से काम नहीं कर रही है। उनका कहना है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत परमिट आवेदनों का तय समय सीमा में निस्तारण और प्राधिकरण की नियमित बैठकें आवश्यक हैं, लेकिन इन प्रक्रियाओं का पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा।
बस मालिकों का कहना है कि इस संबंध में राज्यपाल, परिवहन मंत्री, उद्योग मंत्री, मुख्य सचिव, परिवहन सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि परमिट प्रक्रिया जल्द सामान्य नहीं हुई तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का यह भी कहना है कि लंबे समय तक स्थिति जस की तस रहने पर कई संचालक अपने वाहनों के परमिट निरस्त कराकर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने और पड़ोसी राज्यों में बसों का संचालन करने का विकल्प चुन सकते हैं।
