रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित झारखंड महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के परिणाम के बाद नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे हैं। विभागीय सत्यापन के दौरान 33 चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता संदिग्ध पाए जाने के बाद उनकी नियुक्ति फिलहाल रोक दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन पूरा होने तक उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
313 अभ्यर्थी हुए थे चयनित
महिला पर्यवेक्षिका के 444 पदों पर भर्ती के लिए राज्य सरकार ने अधियाचना भेजी थी। भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन वर्ष 2023 में आमंत्रित किए गए, जबकि परीक्षा सितंबर 2024 में आयोजित हुई। इसके बाद आयोग ने 27 मई 2025 को परिणाम घोषित किया, जिसमें 313 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। शेष 131 पद रिक्त रह गए।
परिणाम जारी होने के बाद आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों की अनुशंसा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को भेजी, जहां दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई।
किन वजहों से बढ़ा संदेह?
विभागीय जांच के दौरान कुछ समानताओं पर अधिकारियों का ध्यान गया, जिसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की गहन जांच शुरू की गई। प्रारंभिक स्तर पर सामने आए प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
- सभी 33 अभ्यर्थियों ने एक ही निजी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।
- सभी की डिग्री लगभग एक ही शैक्षणिक सत्र की बताई जा रही है।
- कई अभ्यर्थियों ने इंटरमीडिएट के छह से सात वर्ष बाद स्नातक पूरा किया।
- अधिकांश ने विज्ञान संकाय (Science) से इंटरमीडिएट करने के बाद समाजशास्त्र विषय से स्नातक किया।
- स्नातक परीक्षा में प्राप्त अंक भी कई मामलों में लगभग समान पाए गए।
विभाग का कहना है कि इन तथ्यों के आधार पर दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
शिक्षक नियुक्ति में भी शिकायतें
इसी बीच राज्य में चल रही माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कुछ अभ्यर्थियों ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतों में कंप्यूटर साइंस, एआई एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी एवं डेटा साइंस जैसे विषयों की डिग्रियों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि प्राप्त शिकायतों की भी नियमानुसार जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद होगा फैसला
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के दायरे में हैं, उनके मामले में अंतिम निर्णय सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। यदि प्रमाणपत्र सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
