रांची : झारखंड में बाजार समिति दम तोड़ रही है. सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पूरे राज्य में 28 बाजार समिति हैं, लेकिन उनमें से आधी घाटे में चल रही हैं. हालत यह है कि घाटे को पूरा करने के उपाय करने के बजाय, कर्मचारियों को उनके फिक्स्ड डिपॉजिट निकालकर सैलरी दी जा रही है. इन हालातों के बीच, झारखंड के किसानों को उम्मीद थी कि सरकार नियमावली बनाएगी और स्थानीय खेती की उपज की बिक्री के लिए पर्याप्त सरकारी मदद देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
हालत यह कि विगत एक साल से नयी नियमावली सरकारी फाइलों में घूम रही है. कृषि विभाग से वित्त विभाग, विधि विभाग होते हुए कृषि मंत्री तक पहुंची नई नियमावली पुरानी और नई नियमावली में अंतर स्पष्ट कर इसके लाभ की जानकारी देने के प्रत्याशा में फंसी पड़ी है.
जाहिर तौर पर जब नियमावली ही नहीं होगी तो कामकाज भगवान भरोसे तो होगा ही. कुछ ऐसी ही स्थिति रांची सहित राज्य के सभी बाजार समितियों की है. दूसरे राज्यों के बाहरी आयातित सामानों से झारखंड के बाजार समिति की दुकानें सजी रहती हैं और हमारे किसान या तो सड़क किनारे या बिचौलिए के हाथों अपनी मेहनत की उपज को बेचते फिरते हैं.
- सरकारी फाइलों में उलझकर रह गया नया कृषि उत्पाद नियमावली
- कृषि विपणन परिषद में अध्यक्ष हैं तो पर प्रबंध निदेशक नहीं
- प्रबंध निदेशक का पद महीनों से है खाली
- राज्य भर में 28 बाजार समिति, 95 उप बाजार प्रांगण और 605 साप्ताहिक हाट बाजार चिन्हित हैं.
- बाजार समितियों में 935 कर्मचारियों का पद है सृजित
- 935 सृजित पदों में 115 कर्मचारी ही हैं कार्यरत
- प्रभारी सचिवों के जिम्मे चल रहा है सभी बाजार समिति
झारखंड में स्थित बाजार समिति
रांची, जमशेदपुर, चाकुलिया, हजारीबाग, रामगढ़, डालटनगंज, बोकारो, बेरमो, गढ़वा, मधुपुर, गुमला, सिमडेगा, लोरहदगा, कोडरमा, सरायकेला, गोड्डा, खूंटी, धनबाद, गिरिडीह, साहिबगंज, बरहरवा, लातेहार, पाकुड़, चतरा, चाइबासा, जामताड़ा और दुमका में बाजार समित हैं.
इन 28 बाजार समिति में 11 अस्तित्वहीन होने के कगार पर हैं.
15 बाजार समिति घाटे में हैं, जो फिक्स डिपोजिट के भरोसे चल रहे हैं.
लंबे अरसे के बाद कृषि विपणन पर्षद में बना बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स
किसानों की समस्या दूर करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करने के लिए बना राज्य का कृषि विपणन पर्षद को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स मिल गया है. बीते 16 अप्रैल को कृषि विपणन परिषद के अध्यक्ष रविंद्र सिंह के नेतृत्व में 11 सदस्यी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स बना. हालांकि, इसमें अध्यक्ष के अलावा बाकी सदस्यों का चयन नहीं हुआ. नियमावली में कहा गया है कि जो सचिव होंगे वहीं विपणन पर्षद के प्रबंध निदेशक होंगे. इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी पदेन सदस्य के रूप में होंगे.
खास बात यह है कि एक तरफ सरकार ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के लिए अधिसूचना जारी की है. वहीं दूसरी ओर विपणन पर्षद में एमडी का पद महीनों से खाली है. ऐसे में इसकी बैठक पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. झारखंड कृषि विपणन परिषद के अध्यक्ष रविंद्र सिंह कहते हैं कि बाजार समिति को सुदृद्ध करने के लिए सरकार कृतसंकल्पित है और इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं. बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के गठन होने के बाद इसके माध्यम से समुचित निर्णय लिया जा सकेगा. उन्होंने माना कि झारखंड में बाजार समिति बदहाल स्थिति से गुजर रही है. इसे पटरी पर लाने के लिए सरकार के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं. नियमावली प्रक्रियाधीन है, जिसपर विचारोपरांत निर्णय होगा.
बाजार समिति के व्यवसायी की बढ़ रही है नाराजगी
राज्य का सबसे बड़ा और व्यवसायिक रूप से फायदे में रहने वाला राजधानी रांची का बाजार समिति बदहाली के दौर से गुजर रहा है. यहां के व्यवसायी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सरकार से खासे नाराज हैं. झारखंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स के बाजार समिति अध्यक्ष संजय महुरी कहते हैं कि सरकार आखिर नियमावली किसके लिए लाना चाहती है. यहां तो स्थानीय किसानों के कृषि उत्पादों का व्यवसाय तो होता नहीं है. आयातित सामानों पर यदि सरकार अपना व्यवसाय करना चाहे तो इसका तो विरोध जरूर होगा.
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि पहले अपने किसानों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बाजार समिति तक कैसे लाया जाए, इसकी व्यवस्था करें ना कि अवैध वसूली के लिए इस तरह की नियमावली थोपने का काम करे. व्यवसायी मूलचंद जैन कहते हैं कि बाजार समिति में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. ना तो बाजार समिति के भवनों और दुकानों को मरम्मत किया जाता है और ना ही सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं व्यवसायियों को मुहैया करायी जाती हैं. रांची बाजार समिति में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों से हर दिन बड़ी संख्या में गाड़ियों से भरा सामान आता है, व्यवसायी आते हैं, हजारों मजदूर काम करते हैं, उनके लिए कोई सुविधा नहीं है.


