रांची: जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना के बाद भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। घटना में चार लोगों के घायल होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है।
मरांडी ने कहा कि पहले आपराधिक घटनाओं को लेकर धनबाद की चर्चा होती थी, लेकिन अब राज्य के दूसरे शहरों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस व्यवस्था किस तरह काम कर रही है।
पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने पुलिस विभाग में अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में योग्यता और अनुभव के बजाय सत्ता के प्रति नजदीकी को महत्व दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि पदस्थापन की प्रक्रिया में योग्यता, अनुभव और जवाबदेही को प्राथमिकता नहीं दी जाती है तो इसका असर पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
डीजीपी और अतिरिक्त प्रभार का मुद्दा उठाया
मरांडी ने नीरज सिन्हा के बाद अनुराग गुप्ता और तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने शीर्ष पुलिस पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां दिए जाने पर भी सवाल उठाया। मरांडी ने पूछा कि एडीजी स्तर के अधिकारी मनोज कौशिक को रांची जोनल आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का आधार क्या है और रांची में डीआईजी का पद खाली क्यों है।
उन्होंने मयूर पटेल को दुमका आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
पुराने आरोपों की जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस विभाग में अतिरिक्त प्रभार बांटने के मानदंड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों की जांच में सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की मांग की।
उन्होंने मयूर पटेल और संजीव कुमार के पूर्व पदस्थापन के दौरान कोयला तस्करी से जुड़े लगाए गए आरोपों का भी जिक्र किया और सवाल किया कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।
लंबे समय तक पदस्थापन का इंतजार करने वाले अधिकारियों का भी जिक्र
मरांडी ने राकेश बंसल के लंबे समय तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहने और माइकल राज जैसे अनुभवी अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि किसी आपराधिक घटना के बाद अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजना ही पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक पुलिस विभाग में पदस्थापन की प्रक्रिया में योग्यता, ईमानदारी और जवाबदेही को महत्व दिया जाना चाहिए।
अब कानून-व्यवस्था और पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर नजर है।
