Sunday, September 27, 2026

मांगें नहीं मानी गईं तो 22 अक्टूबर से झारखंड में कार्य बहिष्कार करेंगे डॉक्टर.

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रांची: झारखंड के डॉक्टरों और विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का रोडमैप तैयार किया है। रांची में हुई राज्य स्तरीय संयुक्त बैठक में संगठनों ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को साझा एजेंडा बनाया। डॉक्टर संगठनों ने कहा है कि यदि सरकार 21 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो 22 अक्टूबर से राज्यभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा प्रमुख मांग

डॉक्टर संगठनों की प्रमुख मांगों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है। अस्पतालों में हिंसा की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग भी की गई है।

इसके अलावा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव की मांग उठाई गई है। संगठनों का कहना है कि 50 बेड तक के छोटे एवं मध्यम अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को इसके दायरे से बाहर रखा जाए। वहीं, 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों के लिए नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग की गई है।

सरकारी डॉक्टरों से जुड़ी मांगें

सरकारी डॉक्टरों के लिए DACP यानी समयबद्ध पदोन्नति व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। जूनियर डॉक्टरों के वेतन, मातृत्व अवकाश, संविदा से जुड़ी समस्याओं और नियमित नियुक्तियों को लेकर भी संगठनों ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है।

निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत योजना के पैकेज रेट बढ़ाने, भुगतान समय पर करने और लंबित दावों के जल्द निपटारे की मांग रखी गई है। अस्पतालों के लाइसेंस और अन्य अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग भी शामिल है।

मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड का मुद्दा

संगठनों ने मेडिकल छात्रों को समय पर स्टाइपेंड देने और निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड से होने वाली अनधिकृत कटौती रोकने की मांग भी उठाई है।

5 अक्टूबर से शुरू होगा आंदोलन

डॉक्टर संगठनों के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 5 से 8 अक्टूबर तक जनजागरूकता अभियान से होगी। 9 अक्टूबर को राज्यभर में ब्लैक बैज कार्यक्रम और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 10 से 20 अक्टूबर तक जिलों में बैठकें कर आंदोलन की तैयारियां की जाएंगी।

21 अक्टूबर को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम है। संगठनों का कहना है कि इसके बाद भी यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो 22 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

चिकित्सा संगठनों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, बेहतर कार्य व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराना है। संगठनों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान मरीजों की देखभाल को प्राथमिकता दी जाएगी।

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