मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।
कारोबार के अंत में निफ्टी 50 करीब 78 अंक टूटकर 24,287.65 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 281.09 अंक की गिरावट के साथ 77,728.16 के स्तर पर रहा। हालांकि, निचले स्तरों से बाजार में कुछ सुधार आया, लेकिन खरीदारी इतनी मजबूत नहीं रही कि प्रमुख सूचकांक बढ़त में लौट सकें।
आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार को अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। आईटी क्षेत्र में सबसे अधिक कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.84 फीसदी गिरा। फार्मा और सरकारी बैंक सूचकांक भी नुकसान में रहे।
इसके विपरीत मेटल सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और इंडेक्स लगभग 1.39 फीसदी चढ़ा। निजी बैंक, मीडिया और ऑटो सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए।
हिंडाल्को, टाटा स्टील, एचडीएफसी लाइफ, ओएनजीसी, एक्सिस बैंक और एलएंडटी जैसे शेयरों में मजबूती रही। दूसरी ओर एचसीएल टेक, इंफोसिस, सन फार्मा, टीसीएस और नेस्ले इंडिया पर दबाव रहा।
महंगा क्रूड बना बाजार की बड़ी चिंता
बाजार में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी बढ़कर 89.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से आयात खर्च बढ़ सकता है। इसका असर कंपनियों की लागत, मुनाफे और व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका रहती है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
सोने-चांदी में तेजी
शेयर बाजार में कमजोरी के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में देखी जाने वाली कीमती धातुओं में तेजी रही। 24 कैरेट सोने का भाव करीब 0.41 फीसदी बढ़कर 1,55,139 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। चांदी भी 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 2,37,254 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची।
एशियाई बाजारों में रही मजबूती
भारतीय बाजारों के विपरीत सोमवार को कई प्रमुख एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख रहा। जापान का निक्केई 0.72 फीसदी, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.43 फीसदी और हांगकांग का हैंगसेंग 1.37 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।
अब भारतीय शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर रहने की संभावना है। निवेशक आने वाले सत्रों में तेल बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर खास नजर रखेंगे।
