कुछ साल पहले, कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी. लाखों लोगों की जान चली गई, कई देशों में लॉकडाउन लग गया था, और लोगों की जिंदगी थम सी गई थी. दुनिया अभी उस दर्द और डर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि एक और वायरस सामने आ गया, जिसने पूरी दुनिया में चिंता और डर पैदा कर दी है. इसका नाम है हंटावायरस. जब एक क्रूज शिप पर हंतावायरस फैलने की खबर सामने आने लगी, तो कई लोग इस वायरस को लेकर बहुत चिंतित हो गए और उनके मन में सवाल उठने लग कि क्या यह भी COVID-19 की तरह एक महामारी बन सकता है? क्या यह भी लोगों के बीच उसी तरह फैल सकता है, जिस तरह COVID-19 फैला था? इसी संदर्भ में, हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट फिजिशियन और संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. हरि किशन बुरुगु से एक खास बातचीत की. इस खास इंटरव्यू में, डॉ. बुरुगु ने इस वायरस से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए और समझाया कि क्या यह COVID-19 जितना ही बड़ा खतरा है या नहीं…
सबसे पहले जानिए हंतावायरस क्या है?
हंटावायरस को जूनोटिक इन्फेक्शन माना जाता है. यह जानवरों से इंसानों में फैलता है, खासकर चूहों से. चूहे और गिलहरी इसके मुख्य कैरियर होते हैं. इंसानों में यह चूहों के मल, मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने या हवा में मौजूद दूषित कणों के सांस के जरिए शरीर में जाने से फैलता है. डॉ. बुरुगु का कहना है कि हंटावायरस कोई नई बीमारी नहीं है और यह दुनिया के कई हिस्सों में दशकों से मौजूद है. इस वायरस की पहचान मुख्य रूप से 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान हुई थी, जब हंटान नदी के पास सैनिक बीमार पड़े थे.
डॉ. बुरुगु कहते हैं कि हम अक्सर इसका पता नहीं लगा पाते क्योंकि हम इसे रेगुलर चेक नहीं करते हैं. कई वायरल इन्फेक्शन में एक जैसे लक्षण होते हैं (बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी) और अक्सर मरीज सिर्फ सपोर्टिव ट्रीटमेंट से ही ठीक हो जाते हैं. दूसरे शब्दों में, हंटावायरस शायद लोगों की सोच से भी ज्यादा समय से है.

क्या यह वायरस COVID-19 की तरह ग्लोबल महामारी का रूप ले सकता है?
डॉ. बुरुगु और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, हैन्टावायरस का यह आउटब्रेक COVID-19 की तरह ग्लोबल महामारी का रूप नहीं ले सकता है और आम लोगों के लिए इसका खतरा बहुत कम है. डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप MV होंडियस पर फैले इस वायरस से अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई दूसरे लोग इन्फेक्टेड हो गए हैं. हालांकि इस आउटब्रेक ने ग्लोबल हेल्थ एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ा दी है, लेकिन एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि यह कोरोना वायरस जितना फैलने वाला नहीं है.
COVID-19 या इन्फ्लूएंजा के विपरीत, हंटावायरस इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता है. आम तौर पर, यह इन्फेक्शन किसी के लिफ्ट में आपके पास छींकने से, या किसी लाइन में किसी संभावित संक्रमित व्यक्ति के बगल में खड़े होने से नहीं फैलता है. इसके बजाय, यह इन्फेक्शन आमतौर पर संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से होता है. उदाहरण के लिए, चूहों ने किसी पुराने स्टोररूम, बेसमेंट, वेयरहाउस, सुनसान कमरे या किसी ऐसी जगह पर डेरा डाल लिया है जिसका ठीक से रखरखाव नहीं किया जाता. फिर उनका मल वहीं सूख जाता है. फिर, धूल उड़ती है. छोटे इंफेक्शन फैलाने वाले कण धूल के साथ हवा में फैल जाते हैं, और आप उन्हें अपनी सांस के साथ अंदर ले लेते हैं. यह इंफेक्शन फैलने के मुख्य तरीकों में से एक है.
डॉ. बुरुगु बताते हैं कि जब चूहों के यूरिन या मल से निकले सूखे कण हवा में फैल जाते हैं और जब इंसान उन कणों को सांस के जरिए अंदर ले लेते हैं, तो हैन्टावायरस इंफेक्शन हो सकता है. यही वजह है कि कभी-कभी बंद जगहों पर जहां चूहे संपर्क में आते हैं, वहां इंफेक्शन के मामले सामने आते हैं.

यह कितना खतरनाक है?
हंटावायरस इन्फेक्शन हमेशा हल्के और आम फ्लू जैसे लक्षणों से शुरू होता है. इस शुरुआती स्टेज को बीमारी का प्राइमरी या ‘प्रोड्रोमल’ स्टेज कहा जाता है. जिसमें व्यक्ति को सिर्फ बुखार, तेज दर्द, थकान, जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं और फिर वह ठीक हो सकता है.
लेकिन दूसरी तरफ, हैन्टावायरस बहुत गंभीर हो सकता है. कुछ मरीजों में हैन्टावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) हो जाता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो फेफड़ों और दिल पर असर डालती है. दूसरे मरीजों को किडनी डैमेज या ब्लीडिंग की दिक्कतें भी हो सकती हैं, इसीलिए हैन्टावायरस को एक और मेडिकल नाम दिया गया है, हेमोरेजिक फीवर, जो कुछ मायनों में डेंगू जैसा है. जब बीमारी गंभीर हो जाती है, तो यह तेजी से बढ़ती है और मरीजों में ये लक्षण हो सकते हैं…
- सांस लेने में दिक्क्त
- फेफड़ों की भागीदारी
- ब्लीडिंग के लक्षण
- किडनी खराब
- हृदय संबंधी जटिलताएं
- गंभीर निर्जलीकरण
- लो ब्लड प्रेशर
कुछ मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है और हां, यह कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता है. डॉ. बूरुगु कहते हैं कि कुछ संक्रमण हल्के होते हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए, यह बीमारी बहुत गंभीर हो जाती है, जिसके लिए आईसीयू में भर्ती की आवश्यकता होती है. इसी अनिश्चितता के कारण संक्रामक रोग विशेषज्ञ इस पर विशेष ध्यान देते हैं.
क्या भारत में इस वायरस का कोई खतरा है?
डॉ. बुरुगु का कहना है कि भारत में इसके मामले बेहद दुर्लभ हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर महामारी का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है. इसलिए डरने की कोई बात नहीं है. असल में, डॉ. बुरुगु बताते हैं कि इसके मामले भारत के मेडिकल लिटरेचर में सालों से दर्ज हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने खुद एक दशक से भी पहले क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर की एक रिसर्च को पब्लिश करने में मदद की थी, जिसमें बिना डायग्नोसिस वाले बुखार से पीड़ित मरीज शामिल थे. जब डॉक्टरों ने अलग-अलग वायरल कारणों की जांच की, तो कुछ मरीजों में हंतावायरस इंफेक्शन पाया गया.


