नई दिल्ली: निजी क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के वित्तीय परिणाम घोषित कर दिए हैं. बैंक के लिए यह तिमाही मिश्रित रही, जहां एक ओर मुख्य बैंकिंग परिचालन में मजबूती देखी गई, वहीं चंडीगढ़ शाखा में हुई एक बड़ी धोखाधड़ी ने बैंक के मुनाफे की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगाया.
मुनाफे और आय में वृद्धि
बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Net Profit) 5% बढ़कर 319 करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष की इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 304 करोड़ रुपये था. बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 43,523 करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल 48,422 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है.
NII और मार्जिन का हाल
बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) में 16% की शानदार वृद्धि देखी गई और यह 5,677.19 करोड़ रुपये रही. हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में मामूली गिरावट दर्ज की गई. यह पिछले साल के 5.95% के मुकाबले घटकर 5.93% रह गया है. बैंक ने इस दौरान 10,553 करोड़ रुपये का ब्याज राजस्व अर्जित किया, जो सालाना आधार पर 12% अधिक है.
चंडीगढ़ धोखाधड़ी मामला और प्रोविजनिंग
इस तिमाही के नतीजों में सबसे चर्चा का विषय चंडीगढ़ की एक शाखा में हुई धोखाधड़ी रही. बैंक ने बताया कि कुछ कर्मचारियों और बाहरी तत्वों की मिलीभगत से ग्राहकों की जमा राशि में हेराफेरी की गई थी. बैंक ने पारदर्शिता बरतते हुए इस मामले के निपटान के लिए 645.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया और इसे इसी वित्त वर्ष के लाभ-हानि खाते (P&L Account) में खर्च के रूप में दिखाया है. इस बड़े खर्च के बावजूद बैंक मुनाफे में रहने में सफल रहा.
एसेट क्वालिटी और कैपिटल
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार जारी है. ग्रॉस NPA घटकर 1.61% और नेट NPA 0.48% पर आ गया है. इसके अलावा, बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 15.60% के मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो भविष्य की विकास योजनाओं के लिए सकारात्मक है.
शेयरधारकों के लिए खुशखबरी
बैंक के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 0.25 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है. यह प्रस्ताव आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लागू होगा.
कुल मिलाकर, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने परिचालन के स्तर पर मजबूत प्रदर्शन किया है. बाजार के जानकारों का मानना है कि एसेट क्वालिटी में सुधार और लोन बुक में वृद्धि आने वाले समय में बैंक की स्थिति को और मजबूत करेगी.


