नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News
India Poverty Reduction News: भारत में गरीबी कम होने को लेकर विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के आंकड़े चर्चा में हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन आंकड़ों को साझा करते हुए कहा कि भारत ने गरीबी कम करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उनके अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच देश में करीब 49.6 करोड़ लोग निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी रेखा से ऊपर आए।
मंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और पारदर्शी प्रशासन को दिया। हालांकि, गरीबी में कमी के पीछे विभिन्न आर्थिक और सामाजिक कारकों की भूमिका को समझने के लिए रिपोर्ट के विस्तृत निष्कर्षों पर ध्यान देना जरूरी है।
2011 से 2023 के बीच गरीबी दर में बड़ी गिरावट का दावा
रिपोर्ट के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में प्रतिदिन 4.20 डॉलर की गरीबी रेखा (2021 की क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर) के तहत गरीबी दर वर्ष 2011 में 57.7 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई।
इन आंकड़ों के आधार पर करीब 49.6 करोड़ लोगों के इस गरीबी रेखा से ऊपर आने का दावा किया गया है। यह बदलाव देश में आय, उपभोग और जीवन स्तर से जुड़ी परिस्थितियों में आए परिवर्तन की ओर संकेत करता है।
अत्यधिक गरीबी में भी कमी दर्ज होने की बात
रिपोर्ट में प्रतिदिन 3 डॉलर के गरीबी मानक के आधार पर भी भारत में गरीबी घटने का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मानक पर गरीबी दर वर्ष 2011 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023 में 2.6 प्रतिशत रह गई।
हालांकि, गरीबी के आंकड़ों की तुलना करते समय इस्तेमाल किए गए मानक, क्रय शक्ति समता और संबंधित समयावधि को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
रोजगार में बढ़ोतरी और ग्रामीण महिलाओं की भूमिका
पीयूष गोयल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस अवधि में करीब 13.4 करोड़ अतिरिक्त रोजगार बढ़ने का दावा किया गया है।
मंत्री ने ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी को इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। महिलाओं के भुगतान वाले काम में शामिल होने से परिवारों की आय बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
बिजली और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार
रिपोर्ट में भारत में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में सुधार का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश की करीब 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच है।
इसके साथ घरेलू खपत, रोजगार के अवसरों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं को भी आर्थिक और सामाजिक बदलाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया है। DBT के माध्यम से सरकारी सहायता पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों तक सीधे पहुंचाई जाती है।
पीयूष गोयल ने सरकार की नीतियों को दिया श्रेय
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इन आंकड़ों को भारत की आर्थिक प्रगति और सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के हवाले से सामने आए ये आंकड़े गरीबी में कमी की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, गरीबी के रुझानों को पूरी तरह समझने के लिए आय, रोजगार की गुणवत्ता, क्षेत्रीय असमानताओं और लोगों की बुनियादी जरूरतों तक पहुंच जैसे पहलुओं का भी अध्ययन जरूरी है।
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