रांची | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को मेसर्स अमलगम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड और अन्य के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिसों का तीन महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने एनर्जी वॉचडॉग की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
5 फरवरी के अंतरिम आदेश के पालन का निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2026 को पारित अंतरिम आदेश में JBVNL को प्रतिवादी संख्या 8 और 9 के खिलाफ जारी नोटिसों का तीन महीने के भीतर निपटारा करने को कहा था।
इस आदेश को संबंधित प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP-C संख्या 10538/2026) दाखिल कर चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बाद JBVNL ने नोटिसों पर आगे की सुनवाई रोक दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और JBVNL की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को पारित आदेश में हाईकोर्ट के 5 फरवरी के अंतरिम आदेश पर हस्तक्षेप नहीं किया है।
निगम की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि वह हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप कारण बताओ नोटिसों का निपटारा तीन महीने के भीतर कर देगा।
JBVNL के बयान को रिकॉर्ड पर लिया
खंडपीठ ने JBVNL की ओर से दिए गए बयान को स्वीकार करते हुए निगम को उसी के अनुरूप कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 5 फरवरी 2026 के अंतरिम आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए तीन महीने के भीतर नोटिसों का निपटारा किया जाए।
1 फरवरी 2027 को अगली सुनवाई
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 1 फरवरी 2027 को दोपहर 2:15 बजे का समय निर्धारित किया है। अब JBVNL को निर्धारित तीन महीने की अवधि में नोटिसों पर प्रक्रिया पूरी कर अपना निर्णय लेना होगा।
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