नई दिल्ली: दुनिया के कई देशों में घर खरीदना या किराए पर लेना लगातार महंगा होता जा रहा है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आवास की बढ़ती लागत अब केवल रियल एस्टेट का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और परिवारों की वित्तीय स्थिति पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाली चुनौती बन चुकी है। रिपोर्ट का अनुमान है कि मौजूदा रुझान जारी रहे तो यह दबाव वर्ष 2040 तक बना रह सकता है।
अधिकांश देशों में आय का बड़ा हिस्सा आवास पर खर्च
रिपोर्ट में शामिल 21 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से 20 देशों में लोगों को अपनी मासिक आय का 33 प्रतिशत से अधिक हिस्सा किराया या होम लोन की किस्त चुकाने में खर्च करना पड़ रहा है। वित्तीय विशेषज्ञ आम तौर पर इस स्तर से अधिक खर्च को घरेलू बजट के लिए चुनौतीपूर्ण मानते हैं।
भारत, नाइजीरिया और कोलंबिया जैसे देशों में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में आवास संबंधी खर्च लोगों की आय का बड़ा हिस्सा या लगभग पूरी मासिक कमाई तक पहुंच जाता है, जिससे अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए बजट सीमित हो जाता है।
कीमतों में गिरावट के बावजूद नहीं बढ़ी खरीद क्षमता
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे बाजारों में पिछले एक दशक के दौरान संपत्तियों की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई, लेकिन इससे आम परिवारों की घर खरीदने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। इससे संकेत मिलता है कि केवल संपत्ति की कीमतों में गिरावट आवास की उपलब्धता या वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
युवाओं के सामने बढ़ती आर्थिक जिम्मेदारियां
WEF का कहना है कि आने वाले वर्षों में बदलती जनसंख्या संरचना इस चुनौती को और बढ़ा सकती है। वर्ष 2025 से 2040 के बीच बुजुर्ग आबादी में वृद्धि होने के कारण कामकाजी युवाओं पर कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ आएंगी। उन्हें अपने आवास का खर्च उठाने के अलावा भविष्य के लिए बचत और परिवार के बुजुर्ग सदस्यों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
इसी कारण OECD सदस्य देशों में हाल के वर्षों में अधिक युवा अपने माता-पिता के साथ रहने का विकल्प चुन रहे हैं, ताकि रहने का खर्च कम किया जा सके।
जोखिम वाले निवेश की ओर बढ़ रहा झुकाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के चलते कुछ युवा अधिक आय की उम्मीद में क्रिप्टोकरेंसी और प्रेडिक्शन मार्केट जैसे उच्च जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान बढ़ता है तो वित्तीय बाजारों के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
WEF ने सुझाए संभावित समाधान
इस समस्या से निपटने के लिए WEF ने साझा आवास व्यवस्था (Intergenerational Housing Models) को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। स्पेन, ब्रिटेन और हांगकांग जैसे देशों में ऐसे मॉडल अपनाए जा रहे हैं, जहां अलग-अलग आयु वर्ग के लोग एक ही आवासीय व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। इससे रहने का खर्च कम करने के साथ सामाजिक सहयोग भी बढ़ता है।
भारतीय संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि किफायती आवास योजनाओं का विस्तार, पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आसान ऋण व्यवस्था और आवास क्षेत्र से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


