ठाणे: त्योहारों के सीजन में बाजार जाने वाले ग्राहकों के लिए भुगतान से जुड़ी एक नई परेशानी सामने आई है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर में कई व्यापारी संगठनों ने आगामी UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में दुकानों से डिजिटल पेमेंट के QR कोड हटाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों के इस कदम से कई दुकानों पर फिलहाल कैश भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उल्हासनगर समेत ठाणे जिले के करीब 20 खुदरा और थोक व्यापारी संगठनों ने इस विरोध में हिस्सा लिया है। व्यापारियों का कहना है कि नए MDR से उनके कारोबार की लागत बढ़ेगी। त्योहारों के दौरान खरीदारी बढ़ने के बीच इस फैसले का असर ग्राहकों की भुगतान सुविधा पर भी पड़ सकता है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
केंद्र सरकार और NPCI के नए ढांचे के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से पात्र P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
हालांकि, इसका सीधा भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है और इसे ग्राहकों से वसूलने का प्रावधान नहीं है। वहीं, व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेगा।
छोटे भुगतान और छोटे व्यापारियों को राहत
सरकारी जानकारी के मुताबिक ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
कुछ जरूरी क्षेत्रों, जैसे ईंधन, रेलवे, दूरसंचार और बीमा में ₹2,000 से अधिक के पात्र लेनदेन के लिए अलग से ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
व्यापारियों ने उठाई लागत बढ़ने की चिंता
उल्हासनगर शॉपकीपर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक छतलानी के नेतृत्व में व्यापारियों ने MDR व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। संगठन की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र भेजकर व्यवस्था पर पुनर्विचार या स्पष्ट राहत की मांग की गई है। व्यापारियों ने यह भी संकेत दिया है कि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर व्यापारी संगठनों के विरोध के कारण त्योहारों के दौरान डिजिटल भुगतान पर निर्भर ग्राहकों को वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था रखनी पड़ सकती है। हालांकि, नए नियमों के तहत ग्राहक से अलग से UPI शुल्क लेने की अनुमति नहीं है।
पेट्रोल पंपों पर भी विरोध की चेतावनी
ईंधन कारोबार से जुड़े स्थानीय व्यापारियों ने भी MDR व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने ईंधन कारोबार को शुल्क से छूट देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 15 अक्टूबर से UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की चेतावनी दी गई है।
ऐसे में आने वाले त्योहारों के दौरान ग्राहकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित दुकान पर UPI भुगतान उपलब्ध है या नहीं। वहीं, सरकारी नियमों के अनुसार आम ग्राहक के लिए UPI सेवा और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
