नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026: UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फिलहाल टल सकता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में इस पर चर्चा होनी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुल्क लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर जनवरी 2027 किए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम फैसले की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
क्या है UPI MDR का प्रस्ताव?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लागू होना है। यह शुल्क दुकानदार या संबंधित कारोबारी से लिया जाएगा, न कि सीधे ग्राहक से।
इस व्यवस्था के तहत 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र लेन-देन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। यह नियम हर तरह के UPI ट्रांसफर पर लागू नहीं होगा।
फैसले को टालने की चर्चा क्यों?
प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी कंपनियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। ऐसे समय में नई व्यवस्था लागू होने से कारोबारियों की लागत और भुगतान प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त खर्च संभालना भी चुनौती हो सकता है। इसी वजह से शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
क्या आम ग्राहकों को UPI इस्तेमाल करने पर देना होगा पैसा?
प्रस्तावित MDR को UPI पर लगने वाला सामान्य टैक्स समझना सही नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह शुल्क सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाने वाला मर्चेंट शुल्क है।
व्यक्तिगत खातों के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन और निर्धारित छूट के दायरे में आने वाले छोटे कारोबारियों के लेन-देन भी शुल्क से मुक्त रहेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि NPCI प्रस्तावित व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू करता है या इसकी तारीख आगे बढ़ाई जाती है। मीडिया रिपोर्टों में जनवरी 2027 तक टालने की संभावना बताई गई है, लेकिन ग्राहकों और कारोबारियों को अंतिम स्थिति के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।
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