पटना। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद बिहार की सियासत में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि मतभेद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ही नहीं, बल्कि NDA के घटक दलों के रुख में भी दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा की ओर से देश के भाजपा और NDA शासित राज्यों में UCC को लेकर लक्ष्य की बात किए जाने के बाद JDU ने बिहार में इसे लागू करने को लेकर अपनी असहमति जाहिर की है। वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की ओर से इस विषय पर सीधे विरोध के बजाय बातचीत और विचार-विमर्श का रास्ता अपनाने की बात कही गई है।
JDU ने बिहार में UCC को लेकर जताया विरोध
JDU के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने बिहार में UCC लागू किए जाने की संभावना का विरोध किया है। उनका कहना है कि पार्टी का इस मुद्दे पर रुख पहले से स्पष्ट है और बिहार में इसे लागू करने की सहमति नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि संसद में किसी प्रस्ताव या कानून को लेकर पार्टी का रुख और किसी राज्य में उसके कार्यान्वयन का सवाल अलग-अलग हो सकता है। उनके बयान से यह संकेत मिला कि बिहार में UCC को लेकर JDU अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति बनाए रखना चाहती है।
गठबंधन सरकार का भी दिया हवाला
श्याम रजक ने बिहार की गठबंधन सरकार की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में भाजपा अकेले सत्ता में नहीं है। NDA में JDU समेत कई सहयोगी दल शामिल हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर फैसला गठबंधन के भीतर सहमति के आधार पर होने की बात सामने आ रही है।
इस रुख से यह सवाल उठने लगा है कि यदि केंद्र स्तर पर भाजपा UCC को अपने प्रमुख एजेंडे के तौर पर आगे बढ़ाती है, तो बिहार में उसके सहयोगी दलों के अलग विचारों के साथ किस तरह तालमेल बनाया जाएगा।
HAM ने बातचीत का विकल्प रखा
JDU के कड़े रुख के विपरीत बिहार सरकार में HAM नेता और मंत्री संतोष सुमन ने UCC के मुद्दे पर बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर पहले विचार-विमर्श होना चाहिए और इसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
संतोष सुमन के रुख से NDA के भीतर UCC को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। एक ओर JDU इस मुद्दे पर बिहार में विरोध जता रही है, जबकि HAM ने चर्चा के जरिए आगे बढ़ने की संभावना खुली रखी है।
भाजपा के लिए गठबंधन में सहमति बनाना चुनौती
UCC को लेकर भाजपा की राष्ट्रीय नीति और बिहार के सहयोगी दलों के रुख में अंतर आने वाले समय में गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
भाजपा UCC को देश में समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखती रही है। दूसरी ओर, उसके कुछ सहयोगी दल इस मुद्दे पर अपने-अपने राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर अलग रुख रखते हैं।
क्या है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) का उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय आम तौर पर इस बहस के केंद्र में रहते हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।
बिहार में आगे क्या होगा?
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में UCC पर राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। JDU ने जहां अपने विरोध का संकेत दिया है, वहीं HAM ने चर्चा की गुंजाइश बनाए रखी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा और उसके बिहार स्थित सहयोगी दल इस मुद्दे पर किस तरह साझा रणनीति तैयार करते हैं। फिलहाल UCC बिहार में केवल कानून से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि NDA के भीतर आपसी सहमति और राजनीतिक समन्वय की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
