टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ी हलचल मच गई है. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के साथ एक बड़ा क्लाउड कंप्यूटिंग समझौता किया है. स्पेसएक्स और गूगल की यह डील अक्टूबर 2026 से जून 2029 तक यानी करीब 33 महीनों के लिए प्रभावी रहेगी. इस पूरे कॉन्ट्रैक्ट का टोटल अमाउंड लगभग 30 अरब डॉलर यानी करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये बनता है, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है.
SpaceX के एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, गूगल हर महीने 92 करोड़ डॉलर यानी लगभग 7,700 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. इसके बदले में स्पेसएक्स उसे 1,10,000 Nvidia GPU, CPU, मेमोरी और अन्य जरूरी हार्डवेयर तक पहुंच देगी. Nvidia के H200 चिप्स पर बेस्ड यह इन्फ्रास्ट्रक्चर 100 मेगावाट से ज्यादा की कंप्यूटिंग पावर देने में सक्षम है. इसे ऐसे समझें कि यह एक साथ करीब 75,000 घरों को बिजली देने के बराबर है.
गूगल क्लॉड के प्रवक्ता ने क्या कहा?
गूगल क्लॉड के प्रवक्ता ने इस डील को लेकर क्लियर किया है कि यह एक अल्पकालिक लेकिन बेहद जरूरी समझौता है. कंपनी का कहना है कि उसके एआई एजेंट प्लेटफॉर्म जेमिनी एंटरप्राइज की मांग अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. इस कारण इस “ब्रिज कैपेसिटी” की जरूरत पड़ी ताकि ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके.
गौर करने वाली बात यह है कि स्पेसएक्स की S-1 फाइलिंग में खुलासा हुआ था कि 2025 के अंत तक गूगल के पास स्पेक्सएक्स की 6.11% हिस्सेदारी थी. हालांकि, एलन मस्क की xAI के साथ SpaceX के विलय के बाद गूगल की यह हिस्सेदारी घटकर लगभग 5% रह गई है.
विश्लेषकों का मानना है कि xAI अभी कोडिंग क्षमता के मामले में कुछ कंप्टीटर्स से पीछे हो सकती है, लेकिन मेम्फिस का गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर उसकी सबसे बड़ी ताकत है. कंपनी अब मिसिसिपी में भी नया डेटा सेंटर बना रही है, जो उसकी क्षमता को और बढ़ाएगा.
कुल मिलाकर, स्पेसएक्स तेजी से एक रॉकेट कंपनी से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया में एक बड़ी ताकत बनती जा रही है. गूगल और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों का स्पेसएक्स की कंप्यूटिंग क्षमता पर निर्भर होना यह साबित करता है कि AI रेस में डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर ही असली गेम-चेंजर है.


