New Delhi News, 6 November 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर निर्धारण को लेकर 11 मार्च 2026 को दिए गए अपने फैसले पर रुख बरकरार रखा है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें फैसले को केवल भविष्य में होने वाली चयन प्रक्रियाओं पर लागू करने का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि फैसले के क्रियान्वयन को टालने का कोई ठोस या उचित आधार नहीं है। हालांकि, अदालत ने फैसले के अनुपालन के लिए केंद्र सरकार को पहले दी गई छह महीने की अवधि में दो महीने का अतिरिक्त समय दे दिया।
PSU और निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता की आय पर क्या है फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 के फैसले में स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता के वेतन अथवा आय को अकेले ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारित करने का निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत के अनुसार, ओबीसी क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय माता-पिता के पद की स्थिति और श्रेणी के साथ-साथ निर्धारित आय या संपत्ति संबंधी मानदंडों पर भी विचार करना आवश्यक है। यह व्यवस्था वर्ष 1993 के कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप है।
केंद्र की याचिका क्यों हुई खारिज?
केंद्र सरकार ने अनुरोध किया था कि 11 मार्च के फैसले को केवल भविष्य में लागू किया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
पीठ ने कहा कि 11 मार्च 2026 का फैसला अदालत के सामने मौजूद पक्षों के अधिकारों का निर्धारण करता है। संबंधित अभ्यर्थियों को ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी का लाभ देने और उन चयन प्रक्रियाओं में आरक्षण के आधार पर नियुक्ति का अधिकार है, जिनमें वे शामिल हुए थे।
पहले से तय वरिष्ठता और नियुक्तियां नहीं होंगी प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले का लाभ संबंधित अभ्यर्थियों को देने से किसी अन्य व्यक्ति की पहले से निर्धारित वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी।
अदालत के मुताबिक, इस फैसले के आधार पर पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं या नियुक्तियों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। पहले से तय वरिष्ठता और पदोन्नति के मामलों पर भी इसका प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
पीठ ने इस संदर्भ में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के 20 दिसंबर 2016 के पत्र का उल्लेख किया। इसमें स्पष्ट किया गया था कि सिविल सेवा परीक्षा 2016 के तहत चयन सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपीलों के अंतिम फैसले के अधीन होंगे।
क्रीमी लेयर नीति बनाने के लिए केंद्र स्वतंत्र
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान और अदालत द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप आरक्षण तथा क्रीमी लेयर के मानदंडों को लेकर अपनी नीति बनाने के लिए स्वतंत्र है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पदों के बीच समानता निर्धारित करने या क्रीमी लेयर नीति तैयार करने के लिए संबंधित पक्षों से परामर्श की समयसीमा तय करना अदालत का काम नहीं है। ये विषय कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
भारत संघ बनाम रोहित नाथन मामले में आया था फैसला
यह मामला भारत संघ बनाम रोहित नाथन से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को दिए गए फैसले में कहा था कि PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता की आय को अकेले क्रीमी लेयर निर्धारण का आधार नहीं माना जा सकता।
अब अदालत ने केंद्र की फैसले को भविष्य से लागू करने की मांग खारिज करते हुए अपने पूर्व रुख को दोहराया है। साथ ही फैसले के अनुपालन के लिए सरकार को दो महीने का अतिरिक्त समय दिया है।
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