Friday, November 6, 2026

पटाखों के धुएं से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा? जानिए जहरीले प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारी के बीच संबंध

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Health News, 6 November 2026: त्योहारों के दौरान पटाखों और आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं वातावरण में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा सकता है। इससे आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी तत्काल समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, प्रदूषित हवा में मौजूद कुछ सूक्ष्म कण और रासायनिक तत्व लंबे समय तक संपर्क में रहने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर सकते हैं। इनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी शामिल है।

जयपुर स्थित HCG कैंसर हॉस्पिटल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, पटाखों से निकलने वाले धुएं में मौजूद सभी पदार्थ कैंसरकारी नहीं होते, लेकिन वायु प्रदूषण के कुछ घटकों का कैंसर से संबंध स्थापित हुआ है।

पटाखों के धुएं में कौन-कौन से प्रदूषक होते हैं?

पटाखे जलने पर हवा में कई तरह के प्रदूषक फैलते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण।
  • सल्फर डाइऑक्साइड।
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड।
  • रंग पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ धातुओं के यौगिक।
  • अन्य रासायनिक पदार्थ।

इन प्रदूषकों के कारण आसपास की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं।

क्या पटाखों का धुआं कैंसर का खतरा बढ़ाता है?

डॉ. दिनेश कुमार सिंह के मुताबिक, पटाखों के धुएं में मौजूद हर पदार्थ को कैंसर पैदा करने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, वायु प्रदूषण में मौजूद कुछ घटकों का कैंसर से संबंध पाया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने बाहरी वायु प्रदूषण और पार्टिकुलेट मैटर को मनुष्यों के लिए कैंसरकारी के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका विशेष संबंध फेफड़ों के कैंसर से पाया गया है।

लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। समय के साथ ऐसे बदलाव कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकते हैं।

क्या एक-दो दिन पटाखों के धुएं से कैंसर हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार या कुछ दिनों तक पटाखों के धुएं के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा।

कैंसर का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें प्रदूषण के संपर्क की अवधि और तीव्रता, धूम्रपान की आदत, पारिवारिक इतिहास और जीवनशैली से जुड़े पहलू शामिल हैं।

हालांकि, लंबे समय तक या बार-बार प्रदूषित हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए त्योहारों के दौरान ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी वायु प्रदूषण से बचाव जरूरी है।

पटाखों के धुएं से बचाव के लिए क्या करें?

त्योहारों के दौरान प्रदूषण के संपर्क को कम करने के लिए कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:

  1. पटाखों के धुएं के सीधे संपर्क में आने और उनके बहुत करीब खड़े होकर आतिशबाजी देखने से बचें।
  2. हवा की गुणवत्ता खराब होने पर बाहर निकलना सीमित रखें।
  3. बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें।
  4. बाहर प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
  5. बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों का विशेष ध्यान रखें।

स्वच्छ हवा सेहत के लिए क्यों जरूरी?

त्योहार खुशियां मनाने का अवसर हैं, लेकिन पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को भी समझना जरूरी है। प्रदूषण से होने वाली परेशानी केवल आंखों में जलन या खांसी तक सीमित नहीं हो सकती।

लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क से बचना फेफड़ों और संपूर्ण स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। स्वच्छ हवा में सांस लेना कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

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