हजारीबाग/रांची: हजारीबाग के केरेडारी स्थित NTPC की चट्टी बरियातू कोयला खनन परियोजना के आसपास रहने वाले बिरहोर समुदाय की सुरक्षा और पुनर्वास का मामला गंभीर हो गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। आयोग ने हजारीबाग के उपायुक्त को दो सप्ताह के भीतर प्रगति की जानकारी देने और 1 नवंबर तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
खनन क्षेत्र के पास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर सवाल
चट्टी बरियातू कोयला खनन परियोजना 25 अप्रैल 2022 से संचालित है। खदान के आसपास रहने वाले बिरहोर परिवारों की सुरक्षा, मकानों की स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को लेकर मामला आयोग तक पहुंचा था।
NHRC के निर्देश पर हजारीबाग के सदर अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित संयुक्त जांच समिति ने क्षेत्र का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में पगार गांव के बिरहोर टोले में कुल 33 घरों का उल्लेख किया गया है। इनमें खदान के नजदीक स्थित चार मकानों की हालत जर्जर बताई गई।
जांच रिपोर्ट में ब्लास्टिंग के कारण मकानों को नुकसान पहुंचने और खदान से उड़ने वाली धूल के चलते स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की शिकायतें भी दर्ज की गईं।
आठ बिरहोरों की मौत का मामला भी उठा
इस मामले में बिरहोर समुदाय के आठ लोगों की मौत का मुद्दा भी सामने आया है। शिकायत और प्रशासनिक जांच से जुड़े विवरणों में खनन शुरू होने के बाद हुई मौतों का जिक्र किया गया है।
हालांकि, इन मौतों के वास्तविक कारणों और उनका खनन गतिविधियों से सीधा संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिलहाल इस संबंध को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
पुनर्वास से पहले खनन जारी रहने पर आयोग की चिंता
संयुक्त जांच समिति ने बिरहोर परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की जरूरत पर जोर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना खनन गतिविधियां जारी रखने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
NHRC ने NTPC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक से भी स्पष्टीकरण मांगा था कि जांच समिति की सिफारिशों के बावजूद खनन जारी रखने का आधार क्या था। भूमि अधिग्रहण से पहले सामाजिक प्रभाव आकलन कराए जाने के संबंध में भी सवाल उठाए गए हैं।
आयोग की कार्रवाई का मुख्य केंद्र प्रभावित परिवारों के अधिकारों, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का समाधान है।
ढेंगा पुनर्वास कॉलोनी पर बिरहोर परिवारों की असहमति
बिरहोर परिवारों को बसाने के लिए प्रशासन और NTPC की ओर से बड़कागांव के ढेंगा क्षेत्र में पुनर्वास कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, समुदाय के लोगों ने वहां जाने पर सहमति नहीं जताई।
परिवारों का कहना है कि उनकी आजीविका, परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान जंगल से जुड़ी हुई हैं। इसलिए वे ऐसे स्थान पर बसना चाहते हैं, जहां उनकी पारंपरिक जीवनशैली बनी रह सके। ग्रामीणों की ओर से सलगा गांव या डुमरी प्रखंड से सटे वन क्षेत्र में पुनर्वास का विकल्प भी सुझाया गया है।
जिला प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले का समाधान तलाशने के लिए मानवविज्ञानी की सहायता से योजना तैयार करने के वास्ते अतिरिक्त समय मांगा था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, मार्च 2025 में उपायुक्त ने आयोग से समय देने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद स्थायी पुनर्वास योजना को लेकर समाधान अब तक लंबित बताया गया है।
1 नवंबर तक देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
NHRC के संयुक्त रजिस्ट्रार (विधि) इंद्रजीत कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, हजारीबाग के उपायुक्त को पुनर्वास और सुरक्षा से जुड़े कदमों की प्रगति बतानी है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने और 1 नवंबर तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट HRcNet पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है।
अब जिला प्रशासन और NTPC की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। सबसे अहम सवाल यह है कि बिरहोर परिवारों के लिए सुरक्षित और उनकी जरूरतों के अनुकूल पुनर्वास की व्यवस्था कब तक हो पाएगी तथा खनन क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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